ब्राजील राष्ट्रपति चुनाव: लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने दर्ज की ऐतिहासिक जीत, फ्लेवियो बोल्सोनारो को हराया
ब्राजील राष्ट्रपति चुनाव: लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने दर्ज की ऐतिहासिक जीत, फ्लेवियो बोल्सोनारो को हराया
लैटिन अमेरिका के सबसे बड़े देश ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में वामपंथी नेता लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा (Luiz Inácio Lula da Silva) ने एक बार फिर शानदार कमबैक करते हुए चौथी बार सत्ता हासिल कर ली है। उन्होंने बेहद कड़े मुकाबले में दक्षिणपंथी सीनेटर फ्लेवियो बोल्सोनारो (पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे) को शिकस्त दी है।
1. चुनावी नतीजों के मुख्य आंकड़े:
लूला डा सिल्वा: 51.75% वोट
फ्लेवियो बोल्सोनारो: 48.25% वोट
ऐतिहासिक संदर्भ: मंगलवार को 81 वर्ष के होने जा रहे लूला ने सभी अनुमानों को झुठलाते हुए लैटिन अमेरिका में चल रही दक्षिणपंथी लहर (जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन प्राप्त था) के प्रभाव को रोक दिया है।
2. चुनाव के दौरान उठापटक और विवाद:
मतदान का समय बढ़ाना: सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी समय में मतदान का समय दो घंटे बढ़ाने का फैसला लिया। लूला के खेमे ने शिकायत की थी कि कई शहरों में बसें बंद कर दी गई थीं, जिससे वोटर्स को परेशानी हुई। वहीं, बोल्सोनारो ने भी कुछ हिस्सों में भारी बारिश का हवाला देते हुए समय बढ़ाने का अनुरोध किया था, लेकिन उनके समर्थकों ने देशव्यापी विस्तार की आलोचना की।
गहरे राजनीतिक मतभेद: चुनाव प्रचार के दौरान दोनों पक्षों की ओर से तीखे हमले किए गए, जिससे 20 करोड़ से अधिक आबादी वाले इस देश में गहरे राजनीतिक विभाजन साफ नजर आए।
3. लूला की शानदार राजनीतिक यात्रा और वापसी:
गरीबी से सत्ता तक: उत्तर-पूर्व के एक बेहद गरीब और अनपढ़ किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले लूला चार दशकों से ब्राजील की राजनीति के केंद्र में हैं।
चुनौतियां और जेल का सफर: भ्रष्टाचार के मामलों में 18 महीने से अधिक जेल काटने (बाद में कानूनी खामियों के चलते आरोप रद्द होने) के बाद उन्होंने 2022 में नाटकीय वापसी की थी। उनकी सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं ने लाखों लोगों को गरीबी और भुखमरी से बाहर निकाला है, जिसके लिए उनका भारी सम्मान किया जाता है।
सोशल मीडिया रणनीति: इस चुनाव में लूला ने अपनी रणनीति बदलते हुए वीडियो सेल्फी और नए डिजिटल तरीकों का इस्तेमाल किया, जबकि उनके समर्थकों ने घर-घर जाकर वोटिंग के लिए भारी अभियान चलाया।
4. चौथे कार्यकाल में लूला के सामने बड़ी चुनौतियां:
बंटा हुआ देश और संसद: लगभग आधी आबादी ने उनके खिलाफ मतदान किया है। इसके अलावा, संसद में दक्षिणपंथी दलों का दबदबा है, जो लूला के लिए नीतिगत फैसले लेना मुश्किल बना सकता है।
आर्थिक और सुरक्षा संबंधी दबाव: धीमी विकास दर, बढ़ती जीवन-लागत, और कामकाजी इलाकों में दहशत फैलाने वाले आपराधिक गुटों से निपटना उनके नए कार्यकाल की सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
विदेश नीति और संप्रभुता: चुनाव प्रचार के दौरान ‘राष्ट्रीय संप्रभुता’ और अमेरिकी प्रभाव (ट्रंप प्रशासन के दबाव) का मुद्दा हावी रहा, जिस पर लूला ने कड़ा रुख अपनाया था।
81 वर्ष की आयु में राष्ट्रपति बने लूला अपने इस कार्यकाल के अंत तक (2030 में) कुल 16 साल देश की सत्ता संभाल चुके होंगे।

