उत्तराखंड की हेंवल नदी की चर्चा: चिपको आंदोलन से प्रेरित ग्रामीणों ने ऐसे दी जीवनधारा को नई जिंदगी
पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में की उत्तराखंड की हेंवल नदी की चर्चा: चिपको आंदोलन से प्रेरित ग्रामीणों ने ऐसे दी जीवनधारा को नई जिंदगी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 139वें संस्करण में उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के चंबा क्षेत्र से बहने वाली हेंवल नदी (Henwal River) का विशेष जिक्र किया है। कभी सूखने के कगार पर पहुंच चुकी यह नदी आज सामुदायिक सहभागिता और पर्यावरण प्रेमियों के अथक प्रयासों से पुनर्जीवित होकर चंबा और आसपास के 80 गांवों की प्यास बुझा रही है।
1. कैसे सूखने के कगार पर पहुंची थी हेंवल नदी?
उद्गम और महत्व: मां सुरकंडा के उद्गम क्षेत्र से निकलने वाली हेंवल नदी करीब 126 प्राकृतिक जलस्रोतों और 28 जलधाराओं के मिलने से बनती है। यह टिहरी के चंबा क्षेत्र की जीवनरेखा है।
संकट के कारण: अंधाधुंध वनों की कटाई, जंगलों के घटने और अवैध खनन गतिविधियों के कारण इसके प्राकृतिक जलस्रोत धीरे-धीरे सूखने लगे थे, जिससे पूरे इलाके में भीषण पेयजल और सिंचाई का संकट खड़ा हो गया था।
2. 1970 के दशक का चिपको आंदोलन और 12 साल का संघर्ष:
प्रेरणा: 1970 के दशक में प्रसिद्ध ‘चिपको आंदोलन’ से प्रेरणा लेते हुए क्षेत्र के ग्रामीणों ने जंगलों को बचाने और अवैध खनन के खिलाफ मोर्चा खोला।
समिति का गठन: स्थानीय स्तर पर ‘हेंवल घाटी पर्यावरण संरक्षण समिति’ का गठन किया गया और नदी व जलस्रोतों को बचाने का अभियान तेज किया गया।
सघन वृक्षारोपण और आंदोलन: खुरेत, जड़धारगांव, गुनोगी, आराकोट और सौड़ जैसे गांवों में सघन पत्तेदार पौधे लगाए गए। इसके अलावा, कटाल्डी गांव में खनन पूरी तरह बंद कराने के लिए ग्रामीणों ने करीब 12 साल तक लंबा संघर्ष और आंदोलन चलाया।
3. प्रमुख पर्यावरणविदों और सहयोगियों का योगदान:
इस ऐतिहासिक पुनर्जीवीकरण अभियान में कई जाने-माने पर्यावरणविदों और स्थानीय नागरिकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई:
प्रमुख नाम: धूम सिंह नेगी, विजय जड़धारी, स्व. कुंवर प्रसून, प्रताप शेखर, बचनी देवी, सुदेशा बहन, दयाल भाई और रघुभाई जड़धारी।
प्रशासनिक सहयोग: ग्रामीणों के साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों, नरेंद्रनगर वन प्रभाग और अन्य सरकारी विभागों ने भी इस मुहिम को सफल बनाने में पूरा योगदान दिया।
4. वर्तमान स्थिति और पेयजल योजनाएं:
जल संरक्षण के व्यापक उपाय: हेंवल नदी का जीर्णोद्धार केवल एक जलधारा को बचाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके जलागम क्षेत्र (Catchment Area), जंगलों, प्राकृतिक जलस्रोतों और वर्षा जल (Rainwater Harvesting) के संरक्षण पर भी बड़े पैमाने पर काम किया गया।
पेयजल और सिंचाई: आज इस नदी के पानी से चंबा और रानीचौरी क्षेत्र के लिए दो बड़ी पंपिंग योजनाएं सफलताપूर्वक संचालित हो रही हैं, जिससे 80 से अधिक गांवों को पेयजल और खेतों के लिए सिंचाई का पानी मिल रहा है।
5. दिग्गजों की प्रतिक्रियाएं:
किशोर उपाध्याय (टिहरी विधायक): उन्होंने कहा कि भागीरथी की सहायक नदियां और गाड़-गदेरे ही गंगा को जीवंत रखते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ में हेंवल नदी का उल्लेख देश भर में अन्य नदियों के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करेगा।
विजय जड़धारी (पर्यावरणविद्): उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि लंबे संघर्ष के बाद नदी का पुनर्जीवित होना बड़ी सफलता है, लेकिन इसे भविष्य में भी बचाए रखने के लिए उद्गम स्थल के पास होटलों-रिजॉर्ट्स से फैलने वाले प्रदूषण और पेड़ों की कटाई पर सख्त रोक लगानी होगी।

