मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में किया ‘सीआईआई इंडस्ट्रियल समिट’ और पंचायत प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में किया ‘सीआईआई इंडस्ट्रियल समिट’ और पंचायत प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को हरिद्वार में औद्योगिक विकास और पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में दो महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकार के सहयोगपूर्ण रवैया को रेखांकित किया और त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के क्षमता विकास पर जोर दिया।
7वें सीआईआई उत्तराखण्ड इंडस्ट्रियल समिट एंड एक्सपो-2026 से जुड़ी मुख्य बातें:
उद्योगों के लिए सहयोगी और सहभागी सरकार: हरिद्वार में आयोजित समिट में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उद्योगों के लिए केवल ‘नियामक’ (Regulator) नहीं, बल्कि एक ‘सहयोगी और सहभागी’ की भूमिका निभा रही है। निवेशकों को सुरक्षित, पारदर्शी और सरल व्यवस्था उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
MSME और रोजगार के आंकड़े: पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में 29,000 से अधिक नई एमएसएमई इकाइयां स्थापित हुई हैं, जिससे लगभग 1.27 लाख युवाओं को रोजगार मिला है। इसके साथ ही सिंगल विंडो सिस्टम के तहत 26 प्रमुख विभागों की 206 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन प्रदान की जा रही हैं।
इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर और औद्योगिक पार्क: ऊधमसिंह नगर के खुरपिया में लगभग 1,002 एकड़ क्षेत्र में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किया जा रहा है। साथ ही, चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा में छोटे उद्योगों के लिए विशेष पार्क तथा हरिद्वार, सेलाकुई और पंतनगर में ‘फ्लैटेड फैक्ट्री’ जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर पहचान: बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान में उत्तराखंड को ‘टॉप अचीवर्स’ श्रेणी में स्थान मिला है, जबकि एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स-2024 में राज्य ने अपनी श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़ी मुख्य बातें:
सशक्त पंचायतें विकसित उत्तराखंड की नींव: मुख्यमंत्री ने हरिद्वार में त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के क्षमता विकास हेतु आयोजित अभिमुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेते हुए कहा कि राज्य के सभी विकासखंडों में एक साथ 60 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण से जोड़ा गया है, जो ग्राम स्तर पर विकास को नई गति देगा।
’मेरा गांव-मेरी जिम्मेदारी’ का संकल्प: जनप्रतिनिधियों से आह्वान किया गया कि वे इस भावना के साथ काम करें कि योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति और कमजोर वर्गों तक पहुंचे।
डिजिटल पंचायत और पारदर्शिता: ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के माध्यम से पंचायतों की कार्ययोजनाओं और वित्तीय प्रगति की जियो-टैगिंग की जा रही है। 5,972 से अधिक ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन ग्राम सचिवालय के रूप में संचालित हो रहे हैं, जिससे ग्रामीण शासन व्यवस्था और अधिक पारदर्शी बनी है।

