पंजाब में सीबीआई की छापेमारी से राजनीतिक सरगर्मी तेज, मुख्यमंत्री भगवंत मान के कैंप ऑफिस और ओएसडी पर कसा शिकंजा
पंजाब में सीबीआई की छापेमारी से राजनीतिक सरगर्मी तेज, मुख्यमंत्री भगवंत मान के कैंप ऑफिस और ओएसडी पर कसा शिकंजा
पंजाब की राजनीति में उस समय भूचाल आ गया जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भ्रष्टाचार के कथित मामलों को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के कैंप ऑफिस और उनके करीबी सहयोगियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद हुई इस कार्रवाई से आम आदमी पार्टी (AAP) की ‘कट्टर ईमानदार’ छवि को बड़ा झटका लगा है, वहीं राज्य में सियासी घमासान तेज हो गया है।
सीबीआई छापेमारी और राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़ी मुख्य बातें:
छापेमारी और कानूनी पृष्ठभूमि: यह हाई-प्रोफाइल कार्रवाई पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के कड़े आदेशों के बाद की गई है, जिसमें अदालत ने राज्य पुलिस को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के उन शुरुआती इनपुट पर कार्रवाई न करने के लिए फटकार लगाई थी जो मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार से संबंधित थे। इसके बाद 5 अक्टूबर 2026 को सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर छापेमारी की।
किनके नाम हैं एफआईआर में: सीबीआई की इस एफआईआर में मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी (OSD) राजबीर सिंह घुम्मन, उनके लंबे समय से करीबी रहे नितिन गोहल, उनके भाई जितिन गोहल, डॉ. रोमि राजा महाजन, संगरूर से युवा विंग के पदाधिकारी बीर देविंदर और आरएस नागरा जैसे नाम शामिल हैं। इन पर मुख्यमंत्री कार्यालय तक ‘बैकडोर एंट्री’, पैसे लेकर सरकारी तबादले और पोस्टिंग कराने, और हथियारों के लाइसेंस जैसे मामलों में मिलीभगत का गंभीर आरोप है।
’आप’ का पक्ष और केंद्र पर हमला: मुख्यमंत्री भगवंत मान और पार्टी नेतृत्व ने इन छापों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है। ‘आप’ का कहना है कि 2027 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले केंद्र सरकार सीबीआई और ईडी का गलत इस्तेमाल कर ‘आप’ सरकार को बदनाम करने और अस्थिर करने की कोशिश कर रही है। पार्टी नेताओं ने इसे ‘पंजाबियत’ पर हमला बताते हुए जनता के सामने रखने का फैसला किया है।
विपक्ष का तीखा हमला: शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल और कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा समेत अन्य विपक्षी दलों ने ‘आप’ सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। विपक्ष का कहना है कि ‘कट्टर ईमानदारी’ का दावा करने वाली पार्टी के सत्ता के गलियारों में भ्रष्टाचार की परतें अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद खुलकर सामने आ रही हैं।
चुनावी असर: साल 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर यह घटनाक्रम एक बड़ा राजनीतिक मोड़ साबित हो सकता है। एक तरफ जहां विपक्ष को ‘आप’ की साख पर सवाल उठाने का मौका मिल गया है, वहीं ‘आप’ इसे केंद्र बनाम पंजाब की लड़ाई के रूप में पेश करने में जुटी है।

