जीएसटी परिषद के बड़े फैसले: रिफंड होगा तेज, इनपुट टैक्स क्रेडिट का भी बढ़ा दायरा
जीएसटी परिषद के बड़े फैसले: रिफंड होगा तेज, इनपुट टैक्स क्रेडिट का भी बढ़ा दायरा
जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में कारोबार को आसान बनाने और टैक्स से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक तेज और सरल करने के लिए कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में रिफंड प्रक्रिया को तेज करने, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दायरा बढ़ाने और कुछ सेवाओं पर दोहरे टैक्स की समस्या दूर करने से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
10 दिन में स्वीकार होगा रिफंड क्लेम
रिफंड प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए क्लेम स्वीकार करने की समय-सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने का प्रस्ताव रखा गया है। अगर 10 दिनों के भीतर रिफंड क्लेम स्वीकार नहीं किया गया और न ही उसमें किसी कमी की जानकारी दी गई, तो उसे स्वतः स्वीकार माना जाएगा।
रिफंड के करीब 90 फीसदी हिस्से को अधिकारी के बजाय सिस्टम आधारित रिस्क असेसमेंट के जरिए मंजूरी देने की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा, रिफंड ऑर्डर जारी होने के बाद भुगतान की प्रक्रिया भी तेज होगी। जहां पहले सात दिनों तक का समय लगता था, वहीं अब इसे घटाकर तीन कार्यदिवस करने का प्रस्ताव है।
कैश लेजर में मौजूद अतिरिक्त राशि का रिफंड भी पूरी तरह ऑटोमेटेड करने की दिशा में कदम उठाया गया है। इसका मतलब है कि इस तरह के रिफंड में अधिकारी के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं पड़ेगी।
निर्यातकों और कारोबारियों को मिल सकता है फायदा
रिफंड प्रक्रिया में इन बदलावों का सबसे ज्यादा फायदा निर्यातकों और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत कारोबार करने वाले व्यवसायों को मिलने की उम्मीद है। आंकड़ों के मुताबिक, रिफंड के करीब 65 फीसदी दावे निर्यात या इनवर्टेड रेट से जुड़े होते हैं। वहीं करीब 19 फीसदी दावे कैश लेजर में उपलब्ध अतिरिक्त बैलेंस से संबंधित हैं।
ITC का दायरा बढ़ा
जीएसटी परिषद ने इनपुट टैक्स क्रेडिट के दायरे को भी बढ़ाने का फैसला किया है। इसके तहत कर्मचारियों के लिए लिए गए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर ITC का लाभ मिलेगा।
इसके अलावा फैक्ट्री परिसर से बाहर लगाए गए टेलीकम्युनिकेशन टावर और पाइपलाइन से संबंधित खर्च पर भी ITC का प्रावधान किया गया है। फ्री सैंपल और एक्सपायरी के कारण राइट-ऑफ किए गए स्टॉक पर भी ITC का लाभ मिल सकेगा, हालांकि इसके लिए कानून में तय शर्तों का पालन जरूरी होगा।
कुछ B2B सेवाओं पर डबल टैक्स से राहत
सरकार ने कुछ बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) सर्विस चेन में दोहरे टैक्स की स्थिति खत्म करने के लिए भी बदलाव किए हैं। एजेंट के माध्यम से बुक की गई 7,500 रुपये प्रति रात तक की होटल बुकिंग, रेस्टोरेंट और कैटरिंग सेवाओं के साथ-साथ पैसेंजर ट्रांसपोर्ट जैसी सेवाओं पर अब दो स्तरों पर टैक्स लगाने के बजाय एक बार टैक्स लगाने की व्यवस्था की जाएगी।
इन फैसलों का उद्देश्य जीएसटी से जुड़ी प्रक्रियाओं को कम जटिल बनाना, कारोबारियों के लिए अनुपालन आसान करना और रिफंड की प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करना है।

