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ऋषि पंचमी 2026: जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महिलाओं के लिए इस व्रत का महत्व

ऋषि पंचमी 2026: जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महिलाओं के लिए इस व्रत का महत्व

​भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष ऋषि पंचमी 15 सितंबर 2026 को है। यह व्रत मुख्य रूप से शुद्धि, प्रायश्चित और सप्तऋषियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन माना जाता है।

​प्रमुख जानकारियां और तिथियां:

​ऋषि पंचमी तिथि: 15 सितंबर 2026

​पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 11:07 बजे से दोपहर 1:33 बजे तक

​पूजे जाने वाले सप्तऋषि: कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ (कुछ परंपराओं में माता अरुंधती का भी स्मरण किया जाता है)।

​महिलाओं के लिए क्यों खास है यह व्रत?

​धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को शुद्धि और प्रायश्चित से जोड़ा गया है। ऐसा माना जाता है कि अनजाने में हुई अशुद्धियों या नियमों के उल्लंघन से मुक्ति पाने के लिए महिलाएं यह व्रत रखती हैं और सप्तऋषियों से क्षमा प्रार्थना करती हैं। हालांकि, यह व्रत पुरुष भी रख सकते हैं।

​ऋषि पंचमी की पूजा विधि:

​स्नान और दातुन परंपरा:

​सूर्योदय से पहले उठकर स्नान किया जाता है।

​पारंपरिक विधि में अपामार्ग (चिरचिटा) के पौधे की दातुन और प्रतीकात्मक रूप से 108 बार स्नान करने की परंपरा है। इसके अलावा मिट्टी, गोबर या आंवले का प्रयोग भी किया जाता है।

​सप्तऋषियों की स्थापना:

​पूजा स्थल की सफाई कर चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं।

​सप्तऋषियों के प्रतीक के रूप में 7 सुपारी, कुश के गट्ठे या उनकी तस्वीरें स्थापित करें।

​पूजा और अर्घ्य:

​सप्तऋषियों को जल, पंचामृत, चंदन, अक्षत, फूल और धूप-दीप अर्पित करें।

​मौसमी फल और पंचमेवा का भोग लगाएं तथा निर्धारित शुभ मुहूर्त में मंत्रों का जाप करते हुए अर्घ्य दें।

​कथा और क्षमा प्रार्थना:

​व्रत की कथा सुनें, आरती करें और जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें। अंत में प्रसाद वितरित करें।

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