Explainer: आखिर भारत के लिए क्यों इतना खास है BRICS Summit? पूरी दुनिया की नजर दिल्ली पर, जानिए हर सवाल का जवाब
Explainer: आखिर भारत के लिए क्यों इतना खास है BRICS Summit?
पूरी दुनिया की नजर दिल्ली पर, जानिए हर सवाल का जवाब
नई दिल्ली | 11 सितंबर 2026
इस बार दिल्ली सिर्फ एक सम्मेलन की मेजबानी नहीं कर रही। 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में जब 11 देशों के नेता एक टेबल पर बैठेंगे, तो पूरी दुनिया की नजरें भारत पर टिकी रहेंगी। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आ चुके हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग लगभग सात साल बाद भारत आ रहे हैं। ईरान, मिस्र, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका समेत कई देशों के प्रमुख मौजूद रहेंगे।
सवाल यह है कि भारत के लिए यह BRICS Summit इतना महत्वपूर्ण क्यों है? आइए आसान भाषा में समझते हैं।
पहले समझिए, BRICS अब कितना बड़ा हो गया है?
शुरुआत में BRIC था – ब्राजील, रूस, भारत और चीन। फिर दक्षिण अफ्रीका जुड़ा। अब यह 11 सदस्यीय समूह बन चुका है। इसमें मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई भी शामिल हैं।
ये देश मिलकर दुनिया की लगभग आधी आबादी, वैश्विक GDP का करीब 40 प्रतिशत और विश्व व्यापार का एक चौथाई हिस्सा रखते हैं। यानी आधी दुनिया की आवाज अब एक मंच पर है।
भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। यह उसकी चौथी बार है। थीम रखी गई है – “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability”। मतलब लचीलापन, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास।
इस Summit में क्या होने वाला है?
12 सितंबर को सदस्य देशों के नेताओं की बंद कमरे वाली बैठक होगी। विषय होगा – वैश्विक शासन व्यवस्था को और समावेशी कैसे बनाया जाए।
उसके बाद ‘भारत इनोवेट्स’ प्रदर्शनी का दौरा, फैमिली फोटो, वृक्षारोपण और शाम को प्रधानमंत्री मोदी का गाला डिनर।
13 सितंबर को खुली बैठक होगी, जिसमें पार्टनर देश भी शामिल होंगे। अंत में New Delhi Declaration जारी की जाएगी।
मुख्य चर्चा के मुद्दे हैं –
लोकल करेंसी में व्यापार बढ़ाना
क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सिस्टम आसान बनाना
खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा
सप्लाई चेन को मजबूत करना
तकनीक और डिजिटल सहयोग
भारत के लिए यह Summit क्यों इतना जरूरी है?
1. स्ट्रेटेजिक आजादी का असली परीक्षा
भारत न तो अमेरिका के खेमे में पूरी तरह है, न ही चीन-रूस के। BRICS उसे दोनों तरफ बात करने का मंच देता है। रूस और चीन के साथ बैठकर भी वह अमेरिका, यूरोप और क्वाड के रिश्तों को बचाए रख सकता है। इसे कहते हैं मल्टी-अलाइनमेंट।
2. चीन के साथ रिश्ते सुधारने का दुर्लभ मौका
शी जिनपिंग सात साल बाद भारत आ रहे हैं। सीमा पर तनाव के बाद यह उच्च स्तरीय मुलाकात बहुत मायने रखती है। भारत चाहता है कि BRICS में चीन का दबदबा न बढ़े और समूह व्यावहारिक सहयोग पर केंद्रित रहे।
3. आर्थिक फायदे
भारत चाहता है कि BRICS देशों के बीच व्यापार आसान हो, पेमेंट में दिक्कत न आए और छोटी कंपनियों को भी मौका मिले। लोकल करेंसी और डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर जोर इसीलिए है। ऊर्जा सुरक्षा और क्रिटिकल मिनरल्स के लिए भी यह मंच फायदेमंद है।
4. ग्लोबल साउथ की अगुवाई
भारत खुद को विकासशील देशों की आवाज बताता है। यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित विकासशील अर्थव्यवस्थाएं हैं। भारत इनके हितों को मजबूती से रखना चाहता है।
5. कूटनीतिक ताकत का प्रदर्शन
पुतिन, शी, ईरान के राष्ट्रपति और खाड़ी देशों के नेता एक साथ दिल्ली में हैं। इतने अलग-अलग हितों वाले देशों को एक मंच पर लाना आसान नहीं होता। यह भारत की कूटनीतिक क्षमता का प्रमाण है।
चुनौतियां भी हैं
समूह जितना बड़ा हुआ है, सहमति बनाना उतना ही मुश्किल। चीन और भारत के बीच प्रतिस्पर्धा, रूस-यूक्रेन मुद्दा, ईरान और खाड़ी देशों के अलग-अलग हित – सब मौजूद हैं। भारत को संतुलन बनाना होगा कि BRICS पश्चिम-विरोधी मंच न बने।
आखिर दुनिया क्यों देख रही है?
क्योंकि यह सिर्फ भारत का कार्यक्रम नहीं। वैश्विक व्यापार तनाव, ऊर्जा संकट और बहुध्रुवीय दुनिया की दिशा तय करने वाली चर्चाएं यहां हो रही हैं। भारत की मेजबानी में यह तय होगा कि BRICS सिर्फ राजनीतिक मंच रहेगा या असली आर्थिक सहयोग का इंजन बनेगा।
संक्षेप में, यह Summit भारत के लिए मौका है अपनी वैश्विक छवि मजबूत करने, आर्थिक हित सुरक्षित रखने और अपनी स्ट्रेटेजिक स्वतंत्रता को और मजबूत करने का। दिल्ली में जो फैसले होंगे, उनकी गूंज दूर-दूर तक सुनाई देगी।
