ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर देश में सियासत तेज: विपक्ष ने उठाए सवाल, तो बीजेपी ने बताया भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीति का प्रमाण
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर देश में सियासत तेज: विपक्ष ने उठाए सवाल, तो बीजेपी ने बताया भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीति का प्रमाण
नई दिल्ली में आयोजित हो रहे ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन को लेकर देश की राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। विपक्षी दलों के नेताओं ने इसके वास्तविक परिणामों और जमीनी विकास पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही है, वहीं भाजपा नेताओं ने इसे भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और कूटनीति की बड़ी जीत बताया है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और सुझाव
एनसीपी (एसपी) का रुख: एनसीपी (एसपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने ब्रिक्स सम्मेलन को सकारात्मक कदम बताया, लेकिन साथ ही जोर दिया कि सरकार को केवल जीडीपी के आंकड़ों तक सीमित न रहकर आम लोगों के जीवन में आए वास्तविक बदलावों पर भी ध्यान देना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं के बयान पर घमासान: कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के ब्रिक्स से जुड़े सवालों पर भाजपा हमलावर नजर आई। हालांकि, कांग्रेस के भीतर ही अलग राय भी देखने को मिली, जहां सांसद शशि थरूर ने ब्रिक्स मंच को आर्थिक और रणनीतिक संबंध मजबूत करने का एक सकारात्मक अवसर बताया।
शिवसेना (यूबीटी) की अपील: शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे ने विपक्ष से अपील की कि वे हर मुद्दे पर राजनीति न करें। उन्होंने माना कि वैश्विक नेताओं के बीच आपसी बातचीत और कूटनीतिक परिचय से देश को किसी न किसी रूप में फायदा जरूर मिलेगा।
बिहार के उत्पादों की वैश्विक सराहना
पटना में मंत्री राम कृपाल यादव ने ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान बिहार के प्रसिद्ध मखाना और सत्तू को अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के समक्ष उपहार के रूप में पेश किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इससे वैश्विक स्तर पर इन पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग होगी।
सत्ता पक्ष का पलटवार
भाजपा का रुख: भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल और राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने पी. चिदंबरम पर निशाना साधते हुए कहा कि जब वे खुद वित्त मंत्री थे, तब भी ऐसे सम्मेलन होते थे, लेकिन अब विपक्ष में होने के कारण वे हर चीज में कमी निकाल रहे हैं।
बढ़ता वैश्विक सम्मान: भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन और ओडिशा के भाजपा नेता अमर पटनायक ने कहा कि रूस और चीन समेत दुनिया के बड़े नेताओं का भारत आना देश के बढ़ते सम्मान को दर्शाता है। मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के दौर में ‘ग्लोबल साउथ’ भारत को अपनी आवाज के रूप में देख रहा है।
