फिल्म रिव्यू: ‘हैवान’ – सैफ और अक्षय की जबरदस्त टक्कर, जानिए कैसी है प्रियदर्शन की यह साइकोलॉजिकल थ्रिलर
फिल्म रिव्यू: ‘हैवान’ – सैफ और अक्षय की जबरदस्त टक्कर, जानिए कैसी है प्रियदर्शन की यह साइकोलॉजिकल थ्रिलर
मशहूर निर्देशक प्रियदर्शन की नई फिल्म ‘हैवान’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। केवीएन प्रोडक्शंस और थेस्पियन फिल्म्स के बैनर तले बनी इस फिल्म की कुल अवधि 2 घंटे 44 मिनट है। फिल्म को 3.5 स्टार्स की रेटिंग दी गई है, आइए जानते हैं कि यह फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।
चूहे और बिल्ली का खतरनाक खेल
फिल्म की कहानी हॉलीवुड की बेहतरीन थ्रिलर्स (जैसे ‘डोंट ब्रीच’ या ‘अ क्वाइट प्लेस’) की शैली पर आधारित है, जहां डर सिर्फ खून-खराबे से नहीं बल्कि दिमागी जंग और खामोशी से पैदा होता है। एक तरफ परशुराम (अक्षय कुमार) हैं जो हर कदम बहुत सोच-समझकर उठाते हैं, तो दूसरी तरफ श्याम (सैफ अली खान) हैं जो देख नहीं सकते, लेकिन अपनी तेज इंद्रियों और सुनने की क्षमता से हर खतरे को भांप लेते हैं। इन दोनों के बीच का यह मुकाबला फिल्म में लगातार सस्पेंस बनाए रखता है।
अभिनय और किरदार
अक्षय कुमार (परशुराम): अक्षय का यह डार्क और खामोश अंदाज बेहद खतरनाक अहसास कराता है। उनके फेशियल एक्सप्रेशंस कई बड़े एक्शन सीन्स पर भारी पड़ते हैं।
सैफ अली खान (श्याम): एक दृष्टिबाधित व्यक्ति के किरदार में सैफ ने गजब का संयम और परिपक्वता दिखाई है। उनकी सतर्कता और चालें कहानी में रोमांच पैदा करती हैं।
सपोर्टिंग कास्ट: फिल्म में बोमन ईरानी, सैयामी खेर, श्रिया पिलगांवकर और शारिब हाशमी (पुलिस ऑफिसर के रूप में) ने अपनी भूमिकाओं को बखूबी निभाया है। वहीं, असरानी का काम कहानी में भावुक जुड़ाव लाता है।
निर्देशन और संगीत
प्रियदर्शन ने साबित कर दिया है कि वह सिर्फ कॉमेडी ही नहीं, बल्कि थ्रिलर फिल्मों के भी उस्ताद हैं। फिल्म की लंबाई थोड़ी ज्यादा (2 घंटे 44 मिनट) जरूर है, लेकिन इसकी कसी हुई पटकथा दर्शकों को बांधे रखती है। प्रीतम का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के डर और तनाव को कई गुना बढ़ा देता है।
निष्कर्ष
सालों बाद बड़े पर्दे पर सैफ अली खान और अक्षय कुमार की जोड़ी की वापसी और मोहनलाल की खास मौजूदगी इस फिल्म को और खास बनाती है। अगर आपको एक ऐसी दिमागी और सस्पेंस से भरी थ्रिलर पसंद है जिसमें आखिरी पल तक यह अंदाजा न लगे कि जीत किसकी होगी, तो ‘हैवान’ आपके लिए एक बेहतरीन सिनेमाई अनुभव साबित हो सकती है!
