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मिसाइल कवच और परमाणु कमांड सुविधा वाला ‘फ्लाइंग क्रेमलिन’: पुतिन भारत पहुंचे दो एक जैसे सुपर प्लेनों के साथ

मिसाइल कवच और परमाणु कमांड सुविधा वाला ‘फ्लाइंग क्रेमलिन’: पुतिन भारत पहुंचे दो एक जैसे सुपर प्लेनों के साथ

अपडेट: 11 सितंबर 2026

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स समिट 2026 के लिए भारत पहुंचे। उनके आने के साथ सबसे ज्यादा चर्चा उनके खास राष्ट्रपति विमानों की हो रही है। मॉस्को से दिल्ली की उड़ान में उन्होंने दो बिल्कुल एक जैसे Ilyushin Il-96-300PU विमानों का इस्तेमाल किया। दोनों का मॉडल, रंग और डिजाइन एक जैसा है। एक में पुतिन सफर कर रहे होते हैं, दूसरा डिकॉय (नकली/भ्रम पैदा करने वाला) के रूप में साथ उड़ता है।

इस रणनीति को ‘डिकॉय फ्लाइट’ कहा जाता है। दोनों विमान करीब-करीब एक ही गति और रास्ते पर उड़ते हैं। कभी एक का ट्रांसपॉन्डर ऑन होता है तो कभी दूसरे का, जिससे फ्लाइट ट्रैकर्स और संभावित विरोधियों के लिए यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि असली राष्ट्रपति विमान कौन सा है। रूस-यूक्रेन युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच यह सुरक्षा परत अतिरिक्त मानी जा रही है। पहले भी कजाकिस्तान समेत अन्य यात्राओं में इसी तरह की व्यवस्था देखी गई है।

क्या है पुतिन का स्पेशल प्लेन?

Il-96-300PU को ‘फ्लाइंग क्रेमलिन’ या कभी-कभी ‘डूम्सडे प्लेन’ भी कहा जाता है। ‘PU’ का मतलब है Punkt Upravleniya यानी कमांड पोस्ट। यह सामान्य यात्री विमान नहीं, बल्कि उड़ता हुआ कमांड सेंटर है।

मुख्य खासियतें:

मिसाइल हमले से बचाव: एंटी-मिसाइल सिस्टम, रडार जैमिंग, इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर्स और अन्य डिफेंसिव उपकरण लगे हैं।

परमाणु कमांड सुविधा: सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन सिस्टम से पुतिन उड़ान के दौरान भी सैन्य और परमाणु बलों से संपर्क रख सकते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में ‘न्यूक्लियर बटन’ या कमांड पैनल का जिक्र है, हालांकि आधिकारिक रूप से रूस का न्यूक्लियर ऑथराइजेशन मुख्य रूप से Cheget ब्रीफकेस से जुड़ा होता है।

लंबी दूरी की क्षमता (लगभग 11,000–13,000 किमी बिना रिफ्यूलिंग)।

एडवांस्ड कम्युनिकेशन, सैटेलाइट लिंक और डुप्लीकेट सिस्टम, ताकि किसी भी आपात स्थिति में कमांड जारी रहे।

रूस के पास मॉस्को के पास ऐसे कई (रिपोर्ट्स में 4 तक) Il-96-300PU विमान बताए जाते हैं। ये Special Flight Detachment ‘Rossiya’ द्वारा संचालित होते हैं। राष्ट्रपति यात्रा पर मुख्य विमान के साथ रिजर्व/डिकॉय विमान भी जाता है।

यह डबल-एयरक्राफ्ट प्रोटोकॉल सिर्फ बैकअप के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रपति की लोकेशन छिपाने और संभावित खतरे को कम करने के लिए अपनाया जाता है। पुतिन के भारत आगमन पर भी यही सुरक्षा व्यवस्था लागू रही।

(नोट: तकनीकी विवरण सार्वजनिक रिपोर्ट्स और एविएशन ट्रैकिंग पर आधारित हैं। सटीक सैन्य क्षमताएं गोपनीय रहती हैं।)

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