Thursday, September 10, 2026
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अबू सलेम की समय से पहले रिहाई की याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज: 1993 मुंबई धमाकों का दोषी जेल में ही रहेगा

अबू सलेम की समय से पहले रिहाई की याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज: 1993 मुंबई धमाकों का दोषी जेल में ही रहेगा

​नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के दोषी गैंगस्टर अबू सलेम की समय से पहले रिहाई की याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में साफ किया कि अबू सलेम को अभी जेल में ही रहना होगा और उसे समय से पूर्व राहत नहीं दी जा सकती।

​1. 25 साल के प्रत्यर्पण समझौते और सजा का गणित

​सलेम पक्ष की दलील: अबू सलेम के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि पुर्तगाल से वर्ष 2005 में हुए प्रत्यर्पण समझौते के तहत अधिकतम 25 साल की सजा का वादा किया गया था। विचारधीन कैदी (अंडरट्रायल) के समय और अच्छे व्यवहार की छूट को जोड़कर सलेम 27 साल की सजा पूरी कर चुका है, इसलिए उसे रिहा किया जाना चाहिए।

​समझौते के उल्लंघन का आरोप: बचाव पक्ष ने यह आरोप भी लगाया कि भारत सरकार ने प्रत्यर्पण संधि की मूल शर्तों से अलग जाकर सलेम पर अतिरिक्त आरोप तय किए।

​2. केंद्र सरकार का रुख और कोर्ट का फैसला

​2030 में पूरी होगी अवधि: केंद्र सरकार ने याचिका का कड़ा विरोध करते हुए अदालत में स्पष्ट किया कि प्रत्यर्पण समझौते के अनुसार 25 साल की समय-सीमा उसके आधिकारिक प्रत्यर्पण की तारीख से गिनी जाएगी, जो वर्ष 2030 में जाकर पूरी होगी।

​अदालत की मुहर: सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की दलीलों को स्वीकार करते हुए अबू सलेम की अर्जी को अंतिम रूप से खारिज कर दिया।

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