‘हनुमान अंश’ से चमकी शोभिनव सत्या की किस्मत: असिस्टेंट डायरेक्टर से बने ‘नीम करोली बाबा’, अब असल जिंदगी में पूजने लगे लोग
‘हनुमान अंश’ से चमकी शोभिनव सत्या की किस्मत: असिस्टेंट डायरेक्टर से बने ‘नीम करोली बाबा’, अब असल जिंदगी में पूजने लगे लोग
मुंबई: फिल्म इंडस्ट्री में एक सही किरदार किसी कलाकार की किस्मत रातों-रात बदल सकता है। कुछ ऐसा ही हुआ एक्टर शोभिनव सत्या के साथ, जिन्होंने फिल्म ‘हनुमान अंश’ में आध्यात्मिक संत नीम करोली बाबा का किरदार निभाकर जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की है। कभी ‘हैंडसम हंक’ लुक के लिए जाने जाने वाले शोभिनव का यह ट्रांसफॉर्मेशन दर्शकों को इतना पसंद आया कि अब लोग उन्हें एक्टर की जगह असल जिंदगी में भी ‘महाराज’ मानकर पूजने लगे हैं।
1. असिस्टेंट डायरेक्टर से लीड रोल तक का अप्रत्याशित सफर
अचानक मिला मौका: शोभिनव मूल रूप से फिल्म में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर जुड़े थे। मुख्य अभिनेता की तबीयत बिगड़ने पर निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की नजर शोभिनव पर पड़ी। करीब 5 घंटे चले कड़े स्क्रीन टेस्ट के बाद उन्हें इस मुख्य भूमिका के लिए चुना गया।
कैमरे के पीछे बीता दशक: FTII (पुणे) से पढ़ाई पूरी करने के बाद शोभिनव ने करीब 10 सालों तक कैमरे के पीछे काम किया। उन्होंने सेकेंड यूनिट डायरेक्टर, असिस्टेंट डायरेक्टर और स्क्रिप्ट-कंटिन्युटी जैसी कई जिम्मेदारियां निभाई हैं।
2. संत के रूप में मिला अपार प्यार, लेकिन करियर में ‘इमेज बाउंड’ होने का खतरा
रामायण के कलाकारों जैसा प्रभाव: लंबी दाढ़ी, माथे पर तिलक और शांत हाव-भाव में ढले शोभिनव को दर्शकों का असीम प्यार मिल रहा है। हालांकि, फिल्म समीक्षकों का मानना है कि यह छवि उनके करियर के लिए चुनौती बन सकती है—ठीक वैसे ही जैसे रामानंद सागर की ‘रामायण’ के अरुण गोविल (राम) या दीपिका चिखलिया (सीता) अपनी धार्मिक छवि के दायरे से बाहर नहीं निकल पाए थे।
3. भविष्य की राह और अगली परीक्षा
किरदारों में विविधता जरूरी: ‘हनुमान अंश’ के सीक्वल (Part 2) की तैयारियों के बीच शोभिनव के लिए अगली सबसे बड़ी परीक्षा अपनी धार्मिक छवि से बाहर निकलना होगी।
नई पहचान की तलाश: जानकारों के मुताबिक, खुद को एक ही सांचे में ढलने से बचाने के लिए आने वाले समय में उन्हें एक्शन, लवर बॉय या मॉडर्न किरदारों का चयन करना होगा, ताकि दर्शक उन्हें एक वर्सेटाइल (बहुमुखी) एक्टर के रूप में स्वीकार कर सकें।
