जन्माष्टमी पर हेमा मालिनी ने शेयर की ‘राधा रास बिहारी’ डांस बैले की झलक, याद किए बचपन में रेखा संग डांस क्लास के पुराने दिन
जन्माष्टमी पर हेमा मालिनी ने शेयर की ‘राधा रास बिहारी’ डांस बैले की झलक, याद किए बचपन में रेखा संग डांस क्लास के पुराने दिन
मुंबई: जन्माष्टमी के पावन अवसर पर बॉलीवुड की ‘ड्रीम गर्ल’ और दिग्गज अभिनेत्री हेमा मालिनी ने अपने प्रसिद्ध डांस बैले ‘राधा रास बिहारी’ की एक खूबसूरत वीडियो झलक सोशल मीडिया पर प्रशंसकों के साथ साझा की है। वीडियो में वह पारंपरिक वेशभूषा और गहनें पहनकर मंच पर राधा के रूप में शास्त्रीय नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुतियां देती नजर आ रही हैं।
1. जन्माष्टमी पर प्रशंसकों को दिया खास संदेश
शास्त्रीय प्रस्तुति: वीडियो में हेमा मालिनी अपनी नृत्य मंडली के साथ मंच पर राधा-कृष्ण के निष्काम प्रेम और भक्ति को शास्त्रीय नृत्य के जरिए दर्शाती नजर आ रही हैं।
बधाई संदेश: वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, “जन्माष्टमी के पावन अवसर पर अपने डांस बैले ‘राधा रास बिहारी’ की एक झलक साझा कर रही हूं। यह जन्माष्टमी सभी के जीवन में शांति, खुशियां और समृद्धि लेकर आए। राधे-राधे… जय श्री कृष्ण।”
सांस्कृतिक सफर: ‘राधा रास बिहारी’ हेमा मालिनी की सबसे चर्चित नृत्य नाट्य प्रस्तुतियों में से एक है। उन्होंने अपने करियर में ‘दुर्गा’, ‘मीरा’, ‘रामायण’, ‘सावित्री’ और ‘राधा कृष्ण’ जैसे कई आध्यात्मिक डांस बैले के माध्यम से भारतीय संस्कृति को बड़े मंचों पर जीवंत किया है।
2. 5 साल की उम्र से शुरू हुआ था नृत्य का सफर
भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी: हेमा मालिनी ने महज 5 साल की उम्र से भरतनाट्यम सीखना शुरू कर दिया था। उनकी मां जया चक्रवर्ती ने उनके इस हुनर को पहचानकर आगे बढ़ाया। बाद में उन्होंने चेन्नई में मशहूर गुरु वेम्पति चिन्ना सत्यम से कुचिपुड़ी नृत्य का गहन प्रशिक्षण लिया।
3. रेखा संग डांस क्लास का दिलचस्प किस्सा
हेमा मालिनी ने हाल ही में टीवी शो ‘इंडियन आइडल’ के दौरान अपनी समकालीन अभिनेत्री रेखा से जुड़ा एक पुराना और मजेदार संस्मरण साझा किया:
बचपन की शरारतें: हेमा मालिनी ने बताया कि जब वे चेन्नई में गुरु वेम्पति चिन्ना सत्यम से कुचिपुड़ी सीख रही थीं, तब रेखा भी उन्हीं डांस क्लासेज में आती थीं।
क्लास से भाग जाती थीं रेखा: उन्होंने याद करते हुए बताया कि रेखा बचपन में बेहद शरारती थीं और अक्सर रिहर्सल के बीच से ही भाग जाया करती थीं, जिससे गुरुजी के लिए उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता था।
