जन्माष्टमी 2026: कान्हा के जन्म के बाद रात में खोलें व्रत या अगले दिन? जानें पारण के नियम और सही तरीका
जन्माष्टमी 2026: कान्हा के जन्म के बाद रात में खोलें व्रत या अगले दिन? जानें पारण के नियम और सही तरीका
नई दिल्ली: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर दिनभर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और उपवास में लीन रहने के बाद मध्यरात्रि 12 बजे कान्हा के जन्म का क्षण भक्तों के लिए बेहद खास होता है। हालांकि, जन्म के बाद अक्सर भक्तों के मन में यह उलझन रहती है कि व्रत का पारण तुरंत रात में करें या अगले दिन सूर्योदय के बाद। आइए जानते हैं शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार व्रत पारण का सही समय और नियम।
1. रात में या अगले दिन: कब करें व्रत का पारण?
मध्यरात्रि पूजा के बाद: सनातन धर्म के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि 12 बजे लड्डू गोपाल का पंचामृत अभिषेक, शृंगार और आरती होती है। पूजन व भोग लगाने के बाद कई भक्त रात में ही कान्हा का प्रसाद ग्रहण कर उपवास खोल लेते हैं।
अगले दिन सूर्योदय के बाद: धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार, अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र की समाप्ति या अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करना अति शुभ माना जाता है। वर्ष 2026 में 5 सितंबर को सुबह 6:08 बजे के बाद पारण का शुभ समय बताया गया है। पारण का समय परिवार की कुल-परंपरा पर भी निर्भर करता है।
2. व्रत खोलते समय ध्यान रखने योग्य बातें
प्रसाद से करें शुरुआत: पारण की शुरुआत हमेशा कान्हा को चढ़ाए गए भोग से ही करें। सबसे पहले चरणामृत/पंचामृत ग्रहण करें, उसके बाद माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी या फल लें।
हल्के आहार का सेवन: दिनभर के उपवास के बाद तुरंत अत्यधिक भारी या तला-भुना भोजन खाने से बचें। सात्विक और हल्का भोजन ही लें।
3. जन्माष्टमी व्रत व पूजन परंपराएं
सात्विक फलाहार: जो भक्त फलाहार व्रत रखते हैं, वे दिनभर दूध, दही, मखाना, फल और सेंधा नमक से बनी सात्विक चीजों का सेवन कर सकते हैं। निर्जला व्रत रखने वाले श्रद्धालु जल और अन्न दोनों का त्याग करते हैं।
रात्रि जागरण: कान्हा के जन्म से पहले भजन-कीर्तन और कथाओं का श्रवण करते हुए रात्रि जागरण करने की विशेष परंपरा है, जिसके बाद मध्यरात्रि में जन्मोत्सव मनाया जाता है।
