तेजस Mk-2 पर पूर्व एयर मार्शल की बड़ी चिंता, बोले- 2035 तक फ्रंटलाइन भूमिका में पड़ सकता है असर
तेजस Mk-2 पर पूर्व एयर मार्शल की बड़ी चिंता, बोले- 2035 तक फ्रंटलाइन भूमिका में पड़ सकता है असर
नई दिल्ली। स्वदेशी लड़ाकू विमान परियोजना तेजस Mk-2 को लेकर भारतीय वायुसेना के पूर्व डिप्टी चीफ एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) नागेश कपूर ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि यदि तेजस Mk-2 बड़ी संख्या में 2030 के दशक के मध्य में भारतीय वायुसेना में शामिल होना शुरू होता है, तो उस समय तक उसकी फ्रंटलाइन ऑपरेशनल भूमिका सीमित हो सकती है।
चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमान को लेकर पूछे गए सवाल पर कपूर ने स्पष्ट कहा कि यदि 2035 के आसपास भारत के पास मुख्य रूप से इसी श्रेणी के विमान हों, जबकि चीन छठी पीढ़ी के प्लेटफॉर्म की दिशा में आगे बढ़ चुका हो, तो ऑपरेशनल लिहाज से यह स्थिति आदर्श नहीं होगी।
5वीं और 6ठी पीढ़ी के विमानों से मुकाबला
5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों में स्टेल्थ, सेंसर फ्यूजन और उन्नत हथियार प्रणालियां प्रमुख विशेषताएं हैं। वहीं छठी पीढ़ी के प्लेटफॉर्म में एआई आधारित क्षमताओं, ड्रोन के साथ समन्वय और नेटवर्क-केंद्रित युद्धक प्रणालियों पर अधिक जोर दिया जा रहा है।
भारत के पास फिलहाल 5वीं या 6ठी पीढ़ी का स्वदेशी लड़ाकू विमान परिचालन सेवा में नहीं है। ऐसे में तेजस Mk-2 को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि भविष्य के युद्धक्षेत्र में उसकी भूमिका कितनी प्रभावी रहेगी।
हालांकि, कपूर ने यह भी कहा कि तेजस Mk-2 को पूरी तरह अप्रासंगिक नहीं माना जा सकता। उनके मुताबिक, भारत जैसे बड़े देश के लिए 5वीं और 6ठी पीढ़ी के सीमित संख्या में विमानों से हर क्षेत्र को कवर करना संभव नहीं होगा। ऐसे में तेजस Mk-2 जैसे विमानों का इस्तेमाल महत्वपूर्ण क्षमताओं के बीच मौजूद अंतर को भरने के लिए किया जा सकता है।
HAL की डिलीवरी में देरी पर उठाए सवाल
पूर्व एयर मार्शल ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने तेजस Mk-1A की डिलीवरी में हो रही देरी को भारतीय वायुसेना के लिए बेहद चिंताजनक बताया।
उनके अनुसार, वायुसेना के लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए स्वदेशी लड़ाकू विमानों की समय पर उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है।
तेजस Mk-2 की भूमिका क्या होगी?
कपूर के बयान का मूल सवाल यह है कि भारत को भविष्य के लिए केवल चौथी पीढ़ी के विमानों पर निर्भर रहने के बजाय 5वीं और 6ठी पीढ़ी की क्षमताओं को भी तेजी से विकसित और शामिल करना होगा।
तेजस Mk-2 भारत की स्वदेशी लड़ाकू विमान क्षमता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है, लेकिन बदलती युद्ध तकनीक के बीच इसे भविष्य के अधिक उन्नत प्लेटफॉर्म के साथ संतुलित करना भारतीय वायुसेना के लिए बड़ी चुनौती होगी।
