BCI में बढ़ा विवाद: को-चेयरमैन वाई.आर. सदाशिव रेड्डी ने चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा से मांगा इस्तीफा
BCI में बढ़ा विवाद: को-चेयरमैन वाई.आर. सदाशिव रेड्डी ने चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा से मांगा इस्तीफा
नई दिल्ली। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के भीतर प्रशासनिक और वित्तीय मुद्दों को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। BCI के को-चेयरमैन और वरिष्ठ अधिवक्ता वाई.आर. सदाशिव रेड्डी ने चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ गंभीर सवाल उठाते हुए उनसे इस्तीफा देने की मांग की है।
रेड्डी ने एक विस्तृत पत्र में BCI की नियुक्ति प्रक्रिया, वित्तीय लेनदेन, लॉ कॉलेजों से कथित योगदान लेने और NALSAR विवाद सहित कई मामलों पर आपत्ति जताई है। उन्होंने इन मामलों की स्वतंत्र जांच, विशेष ऑडिट और BCI की विशेष बैठक बुलाने की मांग की है।
15 दिनों में इस्तीफा देने की मांग
रेड्डी ने कहा कि उनकी मांग किसी व्यक्तिगत विरोध से प्रेरित नहीं है, बल्कि वह संस्था और विधि पेशे के हित में यह मुद्दा उठा रहे हैं। उन्होंने मनन कुमार मिश्रा से तत्काल पद छोड़ने और अधिकतम 15 दिनों के भीतर इस्तीफा देने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि देश का विधि समुदाय बेहतर नेतृत्व का हकदार है।
NALSAR विवाद को बताया गंभीर मामला
रेड्डी ने NALSAR विश्वविद्यालय से जुड़े हालिया विवाद को अपने पत्र में प्रमुखता से उठाया। उनका आरोप है कि दीक्षांत समारोह को लेकर छात्रों की ओर से राय व्यक्त किए जाने के बाद BCI चेयरमैन कार्यालय ने 2026 बैच के छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने जैसा निर्देश जारी किया था।
रेड्डी का दावा है कि इस फैसले पर BCI की बैठक में चर्चा नहीं हुई और उन्हें भी इसकी जानकारी या निर्णय प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया। बाद में आलोचना के बाद कथित निर्देश वापस लिया गया और चेयरमैन की ओर से खेद व्यक्त किया गया।
रेड्डी ने आरोप लगाया कि छात्रों को अपनी राय रखने के कारण पेशे से बाहर किए जाने की चेतावनी देना BCI की प्रतिष्ठा के लिए गंभीर नुकसानदेह था।
नियुक्तियों में पारदर्शिता पर सवाल
रेड्डी ने BCI में कर्मचारियों की नियुक्तियों की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कुछ नियुक्तियां बिना सार्वजनिक विज्ञापन, पारदर्शी चयन प्रक्रिया और मेरिट सूची के की गईं।
उन्होंने परिषद के कर्मचारियों में मनन मिश्रा या उनके परिवार से कथित रूप से जुड़े लोगों की मौजूदगी का भी आरोप लगाया और नियुक्तियों की प्रक्रिया की जांच की मांग की है।
150 करोड़ रुपये के फंड को लेकर सवाल
पत्र में BCI के करीब 150 करोड़ रुपये के फंड के कथित ट्रांसफर का मुद्दा भी उठाया गया है। रेड्डी के अनुसार, पुराने BCI ट्रस्ट के निष्क्रिय होने के बाद 17 सितंबर 2020 को “BCI Trust PEARL-First” नाम से नया ट्रस्ट बनाया गया और बड़ी राशि उसमें ट्रांसफर की गई।
रेड्डी ने दावा किया कि उन्होंने इस कदम पर आपत्ति जताई थी, लेकिन उनकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने ट्रस्ट के गठन और उसके संचालन की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
लॉ कॉलेजों से कथित योगदान लेने का आरोप
रेड्डी ने कुछ लॉ कॉलेजों से BCI Trust PEARL-First के नाम पर कथित तौर पर योगदान मांगे जाने का भी आरोप लगाया है। उनके अनुसार, यह राशि 25 लाख से लेकर 50 लाख रुपये और कुछ मामलों में 1 करोड़ रुपये तक बताई गई है।
उन्होंने सवाल उठाया कि नियामक संस्था द्वारा उन्हीं संस्थानों से धन लेना, जिन्हें वह मान्यता और नवीनीकरण के लिए नियंत्रित करती है, उसकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकता है।
लंबे कार्यकाल पर भी निशाना
रेड्डी ने मनन कुमार मिश्रा के लंबे कार्यकाल को भी मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि मिश्रा 2012 से BCI के शीर्ष नेतृत्व में हैं और 2025 में दोबारा निर्वाचित हुए।
रेड्डी ने तर्क दिया कि किसी निर्वाचित पद पर एक ही व्यक्ति का लंबे समय तक बने रहना संस्थागत प्रतिस्पर्धा और जवाबदेही को प्रभावित कर सकता है।
विशेष ऑडिट और जांच की मांग
रेड्डी ने अपने पत्र में BCI से कई कदम उठाने की मांग की है। इनमें BCI की विशेष बैठक बुलाना, BCI और BCI Trust PEARL-First का विशेष ऑडिट कराना, स्वतंत्र एजेंसी से ऑडिट कराने और रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग शामिल है।
उन्होंने BCI कर्मचारियों का विवरण वेबसाइट पर सार्वजनिक करने तथा लॉ कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से किसी भी प्रकार के दान या योगदान को तत्काल रोकने की मांग भी की है।
अब मनन मिश्रा के जवाब का इंतजार
फिलहाल मनन कुमार मिश्रा की ओर से इन आरोपों पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि BCI नेतृत्व रेड्डी के आरोपों और इस्तीफे की मांग पर क्या जवाब देता है।
