राजस्थान विधानसभा में UCC बिल पेश, लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन होगा जरूरी
राजस्थान विधानसभा में UCC बिल पेश, लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन होगा जरूरी
जयपुर। राजस्थान सरकार ने विधानसभा में समान सिविल संहिता विधेयक-2026 (UCC Bill) पेश कर दिया है। करीब 400 पन्नों के इस प्रस्तावित कानून में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन को लेकर विशेष प्रावधान किए गए हैं।
राजस्थान में रहने वालों के लिए लिव-इन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
प्रस्तावित कानून के मुताबिक, राजस्थान में रहने वाला कोई भी व्यक्ति यदि लिव-इन रिलेशनशिप में है, तो उसे इसका रजिस्ट्रेशन कराना होगा। यह नियम उन लोगों पर भी लागू होगा जो किसी दूसरे राज्य के निवासी हैं, लेकिन राजस्थान में रह रहे हैं।
वहीं, राजस्थान का कोई नागरिक यदि राज्य से बाहर किसी दूसरे राज्य में रह रहा है, तो उसके लिए भी लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन का प्रावधान रखा गया है।
हालांकि, राज्य के विधि मंत्री जोगाराम पटेल के अनुसार राजस्थान में अस्थायी रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों पर यह प्रावधान लागू नहीं होगा।
शादीशुदा व्यक्ति के साथ लिव-इन का रजिस्ट्रेशन नहीं
विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन के लिए कई शर्तें निर्धारित की गई हैं। यदि दोनों में से कोई एक व्यक्ति पहले से विवाहित है, तो लिव-इन का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाएगा।
इसके अलावा प्रतिबंधित नातेदारी की निर्धारित डिग्री के भीतर आने वाले दो लोगों के लिव-इन को भी रजिस्टर नहीं किया जा सकेगा।
यदि कोई व्यक्ति जबरदस्ती, बलपूर्वक, गलत प्रभाव या दबाव के जरिए दूसरे व्यक्ति के साथ लिव-इन में रहने का दावा करता है, तो ऐसे संबंध का भी रजिस्ट्रेशन नहीं होगा।
लिव-इन से जन्मे बच्चों को वैध माना जाएगा
UCC Bill में लिव-इन रिलेशनशिप से जन्म लेने वाले बच्चों के अधिकारों को भी मान्यता देने का प्रावधान है। सरकार के मुताबिक, रजिस्टर्ड लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों को वैध माना जाएगा।
विधेयक में लिव-इन के रजिस्ट्रेशन, उससे होने वाली संतान, रजिस्ट्रेशन नहीं कराने की स्थिति और इसके कानूनी प्रभावों के साथ-साथ दंड संबंधी प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
18 धाराओं में लिव-इन से जुड़े प्रावधान
लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधान विधेयक की धारा 384 से 401 के बीच शामिल किए गए हैं। इनमें संबंध के रजिस्ट्रेशन से लेकर उसके समाप्त होने और इससे जुड़े कानूनी पहलुओं को निर्धारित करने की व्यवस्था है।
समान कानून का दावा
राजस्थान सरकार का कहना है कि UCC Bill का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत कानूनों में समता, न्याय और एकरूपता सुनिश्चित करना है। सरकार के मुताबिक इससे राज्य में एकीकृत कानूनी ढांचा तैयार होगा।
विधेयक में पंथनिरपेक्षता, लैंगिक न्याय और सामाजिक सुधार के सिद्धांतों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इसके जरिए विवाह, तलाक और उत्तराधिकार से जुड़े नियमों में समानता लाने का प्रस्ताव है।
अब विधानसभा में विधेयक पर चर्चा और आगे की विधायी प्रक्रिया के बाद इसके प्रावधानों के लागू होने की स्थिति स्पष्ट होगी।
