उत्तराखंड: देहरादून और हरिद्वार में वन-आधारित उद्योगों पर वन विभाग का बड़ा छापा, पारदर्शिता के लिए दूसरे डिवीजन की टीमें तैनात
उत्तराखंड: देहरादून और हरिद्वार में वन-आधारित उद्योगों पर वन विभाग का बड़ा छापा, पारदर्शिता के लिए दूसरे डिवीजन की टीमें तैनात
उत्तराखंड वन विभाग ने राज्य में अवैध वन उपज की खपत, कटान और तस्करी को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर औचक निरीक्षण अभियान शुरू किया है। देहरादून और हरिद्वार के प्लाईवुड, आरा मिल और लीसा प्रसंस्करण जैसे वन-आधारित (Forest-based) उद्योगों पर विभाग की पैनी नजर है।
1. अभियान की प्रमुख बातें और हालिया कार्रवाई
कार्रवाई का क्षेत्र: हरिद्वार में अवैध वन उपज से बने सामान को सीज किया गया है, वहीं देहरादून प्रभाग के लालतप्पड़ स्थित एक संस्थान में छापेमारी की गई है।
निरीक्षण का दायरा: इस अभियान के तहत प्लाईवुड इकाइयां, लकड़ी प्रसंस्करण उद्योग, आरा मिलें, लीसा (Resin) उद्योग और वन उपज के भंडारण/परिवहन केंद्रों की जांच की जा रही है।
दस्तावेजों की जांच: विभाग संस्थानों के पास मौजूद कच्चे माल के स्रोत, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और परिवहन परमिट की गहन पड़ताल कर रहा है।
2. निष्पक्षता के लिए नई रणनीति: ‘क्रॉस-डिवीजन’ जांच
स्थानीय स्तर पर मिलीभगत, दबाव या पक्षपात की आशंका को खत्म करने के लिए वन विभाग ने एक विशेष रणनीति अपनाई है:
दूसरे प्रभाग की टीमें: जिस क्षेत्र में उद्योग स्थित है, वहां की स्थानीय टीम के बजाय दूसरे वन प्रभाग (Division) की टीमों को अचानक निरीक्षण के लिए भेजा जा रहा है।
उद्देश्य: इससे जांच प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनती है तथा अवैध कटान की लकड़ी को वैध बाजार में खपाने की पूरी चेन को तोड़ा जा सकता है।
3. अधिकारियों का रुख
देहरादून के डीएफओ (DFO) नीरज शर्मा के अनुसार, वनों से जुड़े व्यावसायिक संस्थानों में किसी भी तरह की अवैध गतिविधियों को रोकने और जंगलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान लगातार जारी रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
