उत्तराखंड: नकली डेयरी कारोबार पर बड़ा एक्शन, ‘डेयरी एनालॉग’ और गैर-दुग्ध उत्पादों पर तत्काल प्रभाव से बैन
उत्तराखंड: नकली डेयरी कारोबार पर बड़ा एक्शन, ‘डेयरी एनालॉग’ और गैर-दुग्ध उत्पादों पर तत्काल प्रभाव से बैन
उत्तराखंड के खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने आम लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए नकली डेयरी उत्पादों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने प्रदेश में ‘डेयरी एनालॉग’ (दूध के स्थान पर वनस्पति वसा/तेल से बने उत्पाद) और भ्रामक गैर-दुग्ध उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
1. आदेश के मुख्य बिंदु
प्रतिबंध का दायरा: पूरे राज्य में ऐसे नकली पनीर, घी, मक्खन व अन्य उत्पादों पर बैन रहेगा, जो पैकेजिंग या नाम से उपभोक्ताओं को वास्तविक दुग्ध उत्पाद होने का भ्रम पैदा करते हैं।
समयसीमा: यह प्रतिबंध एक वर्ष तक या भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा अंतिम मानक अधिसूचित किए जाने तक लागू रहेगा।
किन्हें छूट? FSSAI के तय मानकों के अनुसार बने फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे मानकीकृत उत्पाद इस प्रतिबंध से बाहर रहेंगे।
2. क्यों उठाना पड़ा यह कदम?
स्वास्थ्य सुरक्षा व भ्रम निवारण: बाजार में ऐसे उत्पादों की भरमार हो गई थी जो दिखने में असली पनीर या घी जैसे लगते थे, लेकिन उनमें दूध की जगह वनस्पति तेल और मिलावटी अवयव इस्तेमाल हो रहे थे।
मुख्यमंत्री का निर्देश: सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के बाद वैज्ञानिक परीक्षण, प्रयोगशाला विश्लेषण और जोखिम मूल्यांकन की रिपोर्ट के आधार पर यह सख्त फैसला लिया गया है।
3. विभाग का आगामी एक्शन प्लान
सख्त जांच अभियान: राज्यभर में डेयरी इकाइयों, गोदामों, होटलों, रेस्टोरेंटों, मिठाई दुकानों और बाजारों में व्यापक जांच अभियान चलाया जाएगा।
कठोर कानूनी कार्रवाई: अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ FSSAI अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने, उत्पाद जब्त करने और लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
उपभोक्ताओं से अपील: खाद्य सुरक्षा आयुक्त ने लोगों से अपील की है कि वे खरीदारी करते समय पैकेजिंग/लेबलिंग ध्यान से देखें और किसी भी संदिग्ध उत्पाद की शिकायत तुरंत विभाग को दर्ज कराएं।
