UPI ट्रांजैक्शन चार्ज पर सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण: आम नागरिकों और छोटे कारोबारियों के लिए यूपीआई रहेगा पूरी तरह फ्री
UPI ट्रांजैक्शन चार्ज पर सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण: आम नागरिकों और छोटे कारोबारियों के लिए यूपीआई रहेगा पूरी तरह फ्री
सरकार ने स्पष्ट किया है कि रोजमर्रा के यूपीआई (UPI) लेन-देन पर न तो आम ग्राहकों को कोई अतिरिक्त चार्ज देना होगा और न ही छोटे कारोबारियों से मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वसूला जाएगा। संसद के मानसून सत्र में पेश किए गए ‘कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक 2026’ के बाद उठ रही अफवाहों पर विराम लगाते हुए यह जानकारी दी गई है।
1. आम नागरिकों और छोटे कारोबारियों के लिए क्या बदलेगा?
P2P (व्यक्ति से व्यक्ति) ट्रांसफर: एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के खाते में पैसे भेजना पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेगा।
P2M (व्यक्ति से मर्चेंट) पेमेंट: छोटे और सामान्य दुकानदारों/व्यापारियों से यूपीआई ट्रांजैक्शन पर कोई एमडीआर (MDR) चार्ज नहीं लिया जाएगा।
भविष्य के शुल्क (यदि लागू हुए तो): यदि भविष्य में कभी एमडीआर लागू भी किया जाता है, तो वह केवल एक निश्चित सीमा से अधिक टर्नओवर वाले बड़े मर्चेंट्स पर ही लगेगा, जो कार्ड्स (Debit/Credit Cards) की तुलना में बेहद मामूली होगा।
निर्णायक संस्था: एमडीआर कब और कितना लागू होगा, इसका निर्णय एनपीसीआई (NPCI) की ‘UPI and Services Steering Committee’ द्वारा लिया जाएगा।
2. कानून में बदलाव का मुख्य उद्देश्य
इन्फ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा: यूपीआई नेटवर्क के विस्तार, नए सिस्टम और मजबूत साइबर सुरक्षा के लिए भारी निवेश की आवश्यकता है।
आत्मनिर्भर रेवेन्यू मॉडल: प्रणाली को पूरी तरह सरकारी सब्सिडी पर निर्भर रखने के बजाय बैंकों और कंपनियों के लिए एक स्थायी, आत्मनिर्भर रेवेन्यू मॉडल तैयार करना है।
3. जुलाई 2026 में यूपीआई का रिकॉर्ड कारोबार
ट्रांजैक्शन वॉल्यूम: जुलाई 2026 में यूपीआई के जरिए 2,366 करोड़ लेन-देन हुए।
कुल वैल्यू: कुल लेन-देन का मूल्य ₹29.9 लाख करोड़ रहा।
वैश्विक विस्तार: यूपीआई अब दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बन चुका है और वर्तमान में 11 विदेशी देशों में लाइव है।
