राजनीति

महिला आरक्षण विधेयक को लेकर आमने-सामने आए राहुल गांधी और किरेन रिजिजू: ‘तुरंत लागू करें’ बनाम ‘बिना शर्त समर्थन करें’ की बहस

महिला आरक्षण विधेयक को लेकर आमने-सामने आए राहुल गांधी और किरेन रिजिजू: ‘तुरंत लागू करें’ बनाम ‘बिना शर्त समर्थन करें’ की बहस

​महिलाओं की आजादी और सामाजिक भागीदारी पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के एक वीडियो बयान के बाद महिला आरक्षण कानून को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और राहुल गांधी के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर तीखी बहस देखने को मिली।

​1. विवाद की शुरुआत: राहुल गांधी का बयान

​महिला अभिव्यक्ति और विकास: राहुल गांधी ने वीडियो शेयर करते हुए कहा कि जब तक महिलाएं खुलकर अपनी बात नहीं रख पाएंगी, तब तक देश पूरी तरक्की नहीं कर सकता।

​पितृसत्ता से आजादी: उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने घरों, परिवारों और सार्वजनिक स्थलों पर सवाल करने व अपनी बात रखने की आजादी मिलनी चाहिए। भारत के विकास के लिए पितृसत्तात्मक नियंत्रण से मुक्ति जरूरी है।

​2. किरेन रिजिजू का तंज

​किरेन रिजिजू ने राहुल के वीडियो को रिपोस्ट करते हुए लिखा कि यह कांग्रेस के नजरिए में सकारात्मक बदलाव का संकेत है।

​उन्होंने उम्मीद जताई कि अब कांग्रेस पार्टी संसद में महिला आरक्षण विधेयक का बिना किसी शर्त के समर्थन करेगी।

​3. राहुल गांधी का पलटवार: ‘तुरंत लागू करें कानून’

​रिजिजू के पोस्ट पर जवाब देते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए:

​सर्वसम्मति से पारित कानून: राहुल गांधी ने लिखा, “संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते आपसे बेहतर कौन जानता होगा कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही कांग्रेस के पूर्ण समर्थन के साथ सर्वसम्मति से पारित हो चुका है।”

​परिसीमन की शर्त पर सवाल: उन्होंने पूछा कि 3 साल बीत जाने के बाद भी इसे लागू क्यों नहीं किया गया और सरकार इसे परिसीमन (Delimitation) से बेवजह क्यों जोड़ रही है?

​मुख्य मांग: उन्होंने सरकार से 2023 के कानून को बिना किसी शर्त और देरी के तुरंत लागू करने की मांग की।

​4. क्या है नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023)?

​33% आरक्षण: इस ऐतिहासिक कानून (संविधान 106वां संशोधन) के तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं।

​विवाद की वजह: कानून पारित होने के बावजूद इसके कार्यान्वयन को जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ा गया है, जिसको लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है।

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