पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये का ऐतिहासिक ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौता’: एक पर हमला माना जाएगा तीनों पर आक्रमण
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये का ऐतिहासिक ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौता’: एक पर हमला माना जाएगा तीनों पर आक्रमण
पश्चिम एशिया में तेजी से बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने शुक्रवार को मक्का के अल-सफा पैलेस में एक त्रिस्तरीय सामूहिक सुरक्षा संधि—’मक्का संयुक्त रक्षा समझौता’ (Makkah Joint Defence Agreement)—पर हस्ताक्षर किए हैं।
1. समझौते के मुख्य प्रावधान और उद्देश्य
सामूहिक सुरक्षा (Article of Collective Defence): इस समझौते की सबसे प्रमुख शर्त यह है कि तीनों में से किसी भी एक देश पर होने वाले सशस्त्र हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा और तीनों देश मिलकर उसका जवाब देंगे।
व्यापक रक्षा सहयोग: इसके तहत तीनों देशों के बीच सैन्य प्रशिक्षण, खुफिया जानकारी साझा करने, रक्षा उत्पादन और क्षेत्रीय सुरक्षा समन्वय को अभूतपूर्व रूप से बढ़ाने का प्रावधान है।
क्षेत्रीय स्थिरता: लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य (Strait) में फैले संघर्ष के बीच यह समझौता खाड़ी और इस्लामी देशों के बीच रणनीतिक गुटबंदी को मजबूत करता है।
2. शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में हुआ हस्ताक्षर
बैठक का स्थल: मक्का स्थित अल-सफा पैलेस।
शामिल नेता:
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ व सेना प्रमुख (फील्ड मार्शल) आसिम मुनीर
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS)
तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन
उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल: पाकिस्तान की ओर से उप-प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री इशाक डार और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भी बैठक में मौजूद रहे।
3. पूर्व रक्षा समझौतों का विस्तार
इससे पहले सितंबर (पिछले वर्ष) में पाकिस्तान और सऊदी अरब ने ‘रणनीतिक आपसी रक्षा समझौता’ किया था, जिसके तहत पाकिस्तानी सैन्य टुकड़ियां और विमान सऊदी अरब में तैनात किए गए थे।
अब तुर्किये के शामिल होने से यह दोपक्षीय रक्षा समझौता त्रिस्तरीय (Trilateral) हो गया है, जो इस क्षेत्र के सैन्य संतुलन को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकता है।
