जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘पूरा शहर बंधक बन जाता है’, पुलिस को शनिवार तक फैसले का निर्देश
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘पूरा शहर बंधक बन जाता है’, पुलिस को शनिवार तक फैसले का निर्देश
नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी के मध्य में स्थित जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शनों के लिए स्थायी स्थल बनाए रखने पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने टिप्पणी करते हुए कहा कि शहर के बीचों-बीच भारी भीड़ जुटने से आम जनजीवन प्रभावित होता है और ऐसा लगता है जैसे पूरे शहर को बंधक बना लिया गया हो।
1. दिल्ली हाई कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां
’शहर के अंदर प्रदर्शन क्यों?’: जस्टिस अमित महाजन ने सुनवाई के दौरान कहा, “मेरे विचार से ऐसी चीजें शहर में नहीं होनी चाहिए, हालांकि अंतिम निर्णय सरकार को लेना है। बेवजह शहर को बंधक क्यों बनने देना चाहिए?”
समय पर निर्णय का निर्देश: अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वह ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी की अर्जी पर शनिवार तक अपना रुख स्पष्ट करे और याचिकाकर्ता को निर्णय से अवगत कराए।
2. दलित क्रिश्चियन कमेटी की याचिका और मांग
10 अगस्त को प्रदर्शन की मांग: ‘ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी’ ने 10 अगस्त को जंतर-मंतर पर 3 घंटे के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी।
75 लोगों की मौजूदगी का दावा: याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि प्रदर्शन में केवल 75 लोग शामिल होंगे और यदि जंतर-मंतर पर अनुमति नहीं दी जाती है, तो पुलिस कोई वैकल्पिक स्थान सुझा सकती है।
मुख्य मुद्दा: संगठन दलित ईसाइयों को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा देने की मांग को लेकर विरोध दर्ज कराना चाहता है।
3. केंद्र सरकार व दिल्ली पुलिस का पक्ष
स्वतंत्रता दिवस का हवाला: अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि स्वतंत्रता दिवस में कुछ ही दिन बाकी हैं, जिसके चलते सुरक्षा कारणों से कड़े इंतजाम किए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में विचारणा: ASG ने यह भी जानकारी दी कि जंतर-मंतर के स्थान पर किसी अन्य वैकल्पिक प्रदर्शन स्थल को तय करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी एक अर्जी पर विचार किया जा रहा है।
