डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: RBI को SOP बनाने और राज्यों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश
डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: RBI को SOP बनाने और राज्यों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश
देश भर में तेजी से बढ़ते ‘डिजिटल अरेस्ट’ और साइबर फ्रॉड के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता जताते हुए केंद्र सरकार, राज्यों और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को पीड़ितों को त्वरित राहत व धन वापसी सुनिश्चित करने के लिए कई अहम निर्देश दिए हैं।
1. सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश
RBI को SOP बनाने का आदेश (4 सप्ताह की समयसीमा): मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने RBI को चार हफ्तों में एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू करने का निर्देश दिया है। इसके तहत ठगी में इस्तेमाल होने वाले फर्जी बैंक खातों पर तत्काल अस्थायी ‘डेबिट रोक’ (Freeze) लगाई जाएगी।
ई-जीरो FIR और त्वरित रिफंड तंत्र: सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ‘ई-जीरो FIR’ (E-Zero FIR) प्रणाली अपनाने और पीड़ितों के पैसे वापस दिलाने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के निर्देश दिए गए हैं।
पीड़ित मुआवजा समिति: केंद्र सरकार को एक विशेष समिति गठित करने को कहा गया है जो साइबर पीड़ितों के लिए मुआवजा व्यवस्था और साझा जिम्मेदारी के ढांचे पर काम करेगी।
व्यापक जन-जागरूकता अभियान: नागरिकों को सतर्क करने और शिकायतों के आसान निवारण तंत्र की जानकारी देने के लिए राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान चलाने को कहा गया है।
2. जांच और रिकवरी की वर्तमान स्थिति
18.05 करोड़ रुपये की वापसी: इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेल (I4C) की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, 57 बैंकों और सभी राज्यों में साइबर ठगी के 36,290 मामलों में अब तक पीड़ितों को ₹18.05 करोड़ वापस दिलाए जा चुके हैं।
CBI की कार्रवाई: डिजिटल अरेस्ट मामलों की जांच में CBI ने 67 प्राथमिक (First-level) बैंक खातों की पहचान की है और 16 राज्यों में 93 स्थानों पर छापेमारी व तलाशी अभियान चलाया है।
