फिल्मी पर्दे से असली जिंदगी तक: जानें कैसे एक नौकर के आंसुओं ने बदल दी संजय दत्त की दुनिया
फिल्मी पर्दे से असली जिंदगी तक: जानें कैसे एक नौकर के आंसुओं ने बदल दी संजय दत्त की दुनिया
मुंबई:
‘मुन्ना भाई’, ‘वास्तव’ के रघु और ‘अग्निपथ’ के कांचा चीना जैसे कई यादगार किरदारों से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले अभिनेता संजय दत्त का जीवन किसी रोमांचक फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा है। पर्दे पर कभी मासूम तो कभी खूंखार विलेन का रोल निभाने वाले संजय दत्त ने अपनी निजी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। एक वक्त ऐसा भी था जब वे नशे की गहरी लत की चपेट में आ गए थे, लेकिन घर के एक नौकर की आंखों के आंसुओं ने उनकी जिंदगी को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया।
रॉकी से शुरुआत और मां का साया उठना:
29 जुलाई 1959 को मुंबई में जन्मे संजय दत्त, दिग्गज अभिनेता सुनील दत्त और अभिनेत्री नरगिस के बेटे हैं। उन्होंने 1971 में फिल्म ‘रेशमा और शेरा’ में बतौर बाल कलाकार काम किया और 1981 में अपने पिता द्वारा निर्देशित फिल्म ‘रॉकी’ से मुख्य अभिनेता के रूप में डेब्यू किया। फिल्म तो सुपरहिट रही, लेकिन इसके रिलीज से ठीक पहले उनकी मां नरगिस दत्त का निधन हो गया, जिसने उन्हें अंदर से पूरी तरह तोड़ दिया।
जब दो दिन तक सोते रहे संजय दत्त:
सफलता के साथ-साथ संजय दत्त नशे की लत के शिकार होते चले गए। खुद संजय दत्त ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि एक बार वे अत्यधिक नशे में लगातार करीब दो दिनों तक सोते रह गए। जब उनकी नींद खुली तो उन्होंने अपने नौकर से खाना मांगा, लेकिन नौकर उन्हें देखकर रोने लगा। नौकर ने रोते हुए बताया कि वे इतने लंबे समय से सो रहे थे कि पूरा परिवार किसी अनहोनी के डर से घबरा गया था। उसी पल संजय दत्त को अहसास हुआ कि अगर उन्होंने खुद को नहीं संभाला तो वे अपनी जिंदगी खो देंगे। इसके बाद उन्होंने खुद को बदलने का फैसला किया और नशे की दुनिया से बाहर निकल आए।
