देहरादून-मसूरी मार्ग पर मंडराया भूस्खलन का खतरा: ULMMC ने चिन्हित किए 3 से 4 लैंडस्लाइड जोन
देहरादून-मसूरी मार्ग पर मंडराया भूस्खलन का खतरा: ULMMC ने चिन्हित किए 3 से 4 लैंडस्लाइड जोन
उत्तराखंड में जारी मूसलाधार बारिश के चलते पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन (Landslide) की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। इस मानसून में सबसे ज्यादा प्रभावित देहरादून-मसूरी मार्ग रहा है, जहां कई स्थानों पर पहाड़ों से मलबा और पत्थर गिरने के कारण यातायात बार-बार बाधित हो रहा है। सड़क सुरक्षा और पर्यटकों की आवाजाही को देखते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) और उत्तराखंड लैंडस्लाइड मिटिगेशन एंड मैनेजमेंट सेंटर (ULMMC) ने मार्ग का तकनीकी अध्ययन पूरा कर लिया है।
ULMMC की स्टडी में सामने आईं मुख्य बातें
ULMMC द्वारा किए गए सर्वेक्षण और तकनीकी अध्ययन में देहरादून-मसूरी मार्ग को लेकर कई संवेदनशील तथ्य सामने आए हैं:
3 से 4 अति-संवेदनशील स्थान: अध्ययन में मार्ग पर 3 से 4 ऐसे स्पॉट्स (Slide Zones) की पहचान की गई है, जहां तीव्र ढलान (Slope) और पानी के रिसाव के कारण जमीन धंसने व मलबे के गिरने का सबसे अधिक खतरा बना हुआ है।
कमजोर स्लोप और ड्रेनेज की समस्या: पहाड़ों से निकलने वाला पानी जब सड़क की ओर बहता है, तो मिट्टी और चट्टानों की पकड़ कमजोर हो जाती है। तेज बारिश के दौरान यही पानी ढलान को अस्थिर कर अचानक भूस्खलन का कारण बनता है।
एक स्थान पर सुरक्षा कार्य पूरा: PWD ने अध्ययन में चिन्हित किए गए एक संवेदनशील स्थान पर सुरक्षात्मक कार्य (Slope Stabilization) पूरा कर लिया है, जबकि बाकी स्पॉट्स पर स्थायी उपचार की जरूरत है।
अत्यधिक बारिश और जल-निकासी बनी मुख्य वजह
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता (EE) राजेश कुमार ने बताया कि कम समय में अत्यधिक बारिश होना इस मार्ग पर भूस्खलन की सबसे बड़ी वजह है। एक साथ भारी मात्रा में पानी गिरने से पहाड़ों पर प्राकृतिक जल निकासी का दबाव बढ़ता है, जिससे चट्टानें सरकने लगती हैं।
वहीं, देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान ने स्थिति पर कहा:
”ULMMC की आधिकारिक रिपोर्ट जल्द ही प्रशासन को मिलने वाली है। रिपोर्ट प्राप्त होते ही चिन्हित क्षेत्रों में वैज्ञानिक तरीकों से स्लोप स्टेबिलाइजेशन और ड्रेनेज सुधार के काम शुरू किए जाएंगे ताकि यह मुख्य पर्यटन मार्ग पूरी तरह सुरक्षित रह सके।”
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था की ‘लाइफलाइन’ है यह मार्ग
देहरादून-मसूरी मार्ग केवल स्थानीय निवासियों के लिए ही नहीं, बल्कि देश-विदेश से आने वाले लाखों पर्यटकों के लिए भी एकमात्र मुख्य मार्ग है। मानसून के दौरान वीकेंड्स पर भी यहाँ पर्यटकों की भारी भीड़ रहती है। मार्ग बंद होने से मसूरी का संपर्क शेष राज्य से कट जाता है, जिसका सीधा असर पर्यटन व्यवसाय पर पड़ता है। ऐसे में बारिश के मौसम में इस मार्ग का स्थायी वैज्ञानिक उपचार करना बेहद अनिवार्य हो गया है।
