मानसून में बुखार: ठंडे पानी से क्यों बचें और क्या हैं इसके सही उपाय?
मानसून में बुखार: ठंडे पानी से क्यों बचें और क्या हैं इसके सही उपाय?
नई दिल्ली: मानसून के मौसम में जलभराव और नमी के कारण डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और वायरल बुखार के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी होती है। बुखार के दौरान अक्सर लोग दो बड़ी गलतियाँ करते हैं—या तो वे नहाना पूरी तरह बंद कर देते हैं, या फिर शरीर का तापमान कम करने के चक्कर में ठंडे पानी से नहा लेते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह तरीका शरीर के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
बुखार में ठंडे पानी से नहाने के खतरे
चिकित्सकों के मुताबिक, बुखार शरीर का एक रक्षा तंत्र है, जो यह दर्शाता है कि शरीर किसी संक्रमण से लड़ रहा है। अत्यधिक ठंडे पानी से नहाने पर त्वचा की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इसके जवाब में शरीर आंतरिक रूप से अधिक ऊष्मा उत्पन्न करने लगता है, जिससे मरीज को कंपकंपी छूट सकती है और अंदरूनी बुखार व बेचैनी बढ़ सकती है। वहीं, ज्यादा गर्म पानी से नहाने से भी शरीर पर तनाव पड़ता है और कमजोरी बढ़ती है।
स्नान और देखभाल का सही तरीका
गुनगुना पानी या स्पंजिंग: बुखार के दौरान गुनगुने पानी से नहाना सबसे सुरक्षित माना जाता है। यदि मरीज बहुत कमजोर हो, तो गुनगुने पानी में सूती कपड़ा भिगोकर पूरे शरीर को पोंछना (स्पंजिंग) बेहतर विकल्प है।
खान-पान और हाइड्रेशन: डिहाइड्रेशन से बचने के लिए नारियल पानी, ओआरएस (ORS), सूप और गुनगुना पानी लेते रहें। भोजन में दलिया और मूंग दाल की खिचड़ी जैसे सुपाच्य आहार को ही प्राथमिकता दें।
प्रमुख लक्षण और प्राथमिक उपचार
विशेषज्ञों के अनुसार, बुखार के अलग-अलग लक्षणों के आधार पर प्राथमिक उपाय किए जा सकते हैं:
अचानक तेज बुखार व घबराहट: ठंडी हवा लगने से आए अचानक बुखार और घबराहट में विश्राम की सलाह दी जाती है।
सिरदर्द और लालिमा: सिर में तेज धक-धक वाले दर्द और शरीर गर्म होने पर मरीज को ठंडे स्थान पर आराम कराना चाहिए।
बदन दर्द और सुस्ती: अत्यधिक सुस्ती, कंपकंपी या जोड़ों में दर्द होने पर शरीर को पर्याप्त आराम और तरल पदार्थों की आवश्यकता होती है।
(डिस्क्लेमर: बुखार 1-2 दिन से अधिक रहने या स्थिति बिगड़ने पर बिना डॉक्टरी सलाह के स्वयं दवा न लें और पंजीकृत चिकित्सक से परामर्श करें।)
