उत्तराखंड: शहरी विकास विभाग में प्रभारी EO की नियुक्तियों पर बड़ा विवाद; बेरोज़गार संघ ने मंत्री पर लगाए 15-15 लाख के भ्रष्टाचार के आरोप, आंदोलन शुरू
उत्तराखंड: शहरी विकास विभाग में प्रभारी EO की नियुक्तियों पर बड़ा विवाद; बेरोज़गार संघ ने मंत्री पर लगाए 15-15 लाख के भ्रष्टाचार के आरोप, आंदोलन शुरू
देहरादून: उत्तराखंड के शहरी विकास विभाग में नगर निकायों के अधिशासी अधिकारियों (EO) के पदों पर की गई ‘प्रभारी’ तैनातियों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। नियमों के उल्लंघन के सवालों के बीच अब उत्तराखंड बेरोज़गार संघ ने मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को संघ के कार्यकर्ताओं ने शहरी विकास निदेशालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और विभागीय मंत्री राम सिंह कैड़ा पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
क्या है पूरा विवाद? (विभागीय आदेश और नियम)
हाल ही में शहरी विकास निदेशालय ने प्रदेश के विभिन्न नगर निकायों (नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत) में कार्यरत कर्मचारियों—जैसे क्लर्क, सफाई निरीक्षक और कर संग्रहकर्ताओं—को प्रभारी अधिशासी अधिकारी (EO) नियुक्त करने का आदेश जारी किया।
स्वीकृत व रिक्त पद: विभाग में ईओ के करीब 60 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से कई पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं।
नियमावली का उल्लंघन: विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि स्थानीय निकाय (केंद्रीयकृत) सेवा नियमावली-2016 के अनुसार सफाई निरीक्षक या क्लर्क सीधे ईओ नहीं बन सकते। इस पद पर नियुक्ति वरिष्ठता, निर्धारित सेवा अवधि या लोक सेवा आयोग की नियमित भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से ही होनी चाहिए।
बेरोज़गार संघ का प्रदर्शन और मंत्री पर 15-15 लाख के आरोप
उत्तराखंड बेरोज़गार संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल के नेतृत्व में युवाओं ने निदेशालय का घेराव कर नारेबाजी की और नियुक्ति आदेशों को तत्काल रद्द करने की मांग की।
राम कंडवाल के मुख्य बिंदु:
भ्रष्टाचार का आरोप: उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय मंत्री राम सिंह कैड़ा ने प्रत्येक ईओ की पोस्टिंग के लिए 15-15 लाख रुपये लेकर नियुक्तियां की हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को लगता है कि ये आरोप गलत हैं तो मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
युवाओं का हक मारा: सालों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को अवसर देने के बजाय अयोग्य कर्मचारियों को प्रभारी बनाकर नियमित भर्ती के मौके खत्म किए जा रहे हैं।
उग्र आंदोलन की चेतावनी: यदि विवादित आदेश वापस नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर के युवा देहरादून आकर मंत्री आवास का अनिश्चितकालीन घेराव करेंगे।
हाईकोर्ट के निर्देशों की अनदेखी का आरोप
यह मामला इसलिए भी प्रशासनिक रूप से गंभीर है क्योंकि वर्ष 2025 में नैनीताल हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नगर निकायों में रिक्त पड़े ईओ पदों पर 4 महीने के भीतर स्थायी समाधान निकालने का निर्देश दिया था।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार ने हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन कर पारदर्शी भर्ती निकालने के बजाय, विभागीय कर्मचारियों को प्रभारी बनाकर मामला निपटाने और लीपापोती करने की कोशिश की है।
विभाग व मंत्री की स्थिति
मामले में गंभीर आरोप लगने के बावजूद फिलहाल शहरी विकास विभाग और मंत्री राम सिंह कैड़ा की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यदि सरकार जल्द ही इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं करती या विवादित आदेश वापस नहीं लेती, तो यह मामला प्रदेश में एक बड़े राजनीतिक व सामाजिक आंदोलन का रूप ले सकता है।
