मानसून में गर्भवती महिलाओं के लिए उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला: एयरलिफ्ट की मिलेगी सुविधा, 10-15 दिन पहले ‘बर्थ वेटिंग होम’ में होंगी शिफ्ट
मानसून में गर्भवती महिलाओं के लिए उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला: एयरलिफ्ट की मिलेगी सुविधा, 10-15 दिन पहले ‘बर्थ वेटिंग होम’ में होंगी शिफ्ट
देहरादून: उत्तराखंड में हर साल मानसून के दौरान पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन और बारिश के कारण सड़कें बंद होना एक आम बात है। ऐसी विपरीत परिस्थितियों में सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं को झेलनी पड़ती है। इसे ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग और उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश भर की गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया है।
सरकार ने फैसला लिया है कि आपात स्थिति में हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं को एयरलिफ्ट कर सीधे अस्पतालों तक पहुंचाया जाएगा।
10 से 15 दिन पहले ‘बर्थ वेटिंग होम’ में किया जाएगा शिफ्ट
मानसून के दौरान दूरस्थ और अति-संवेदनशील क्षेत्रों की स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष तैयारी की है:
सुरक्षित शिफ्टिंग: प्रसव की संभावित तारीख से करीब 10 से 15 दिन पहले ही महिलाओं को नजदीकी अस्पतालों के पास बने ‘बर्थ वेटिंग होम’ में शिफ्ट कर दिया जाएगा।
वैकल्पिक व्यवस्था: यदि अस्पतालों के पास वेटिंग रूम कम पड़ते हैं, तो विभाग की ओर से होटल या कमरे किराए पर लेकर महिलाओं के रहने की व्यवस्था की जाएगी।
हेली सेवा की उपलब्धता: किसी भी इमरजेंसी स्थिति से निपटने के लिए हेली सेवाएं अलर्ट पर रहेंगी ताकि सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराया जा सके।
अगले तीन महीनों का आंकड़ा: आशा कार्यकत्रियां रख रहीं निगरानी
स्वास्थ्य विभाग ने राज्यभर में गर्भवती महिलाओं की जिलेवार सूची तैयार कर ली है। अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के महीनों में होने वाले संभावित प्रसव का विवरण इस प्रकार है:
नैनीताल: 2,487 महिलाएं
टिहरी गढ़वाल: 1,796 महिलाएं
चमोली: 892 महिलाएं
रुद्रप्रयाग: 862 महिलाएं
अन्य जिलों से भी माहवार आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। आशा कार्यकत्रियां और एएनएम (ANM) घर-घर जाकर इन महिलाओं के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रख रही हैं।
मॉनिटरिंग सेल और टेली-कंसल्टेंसी से मिल रही मदद
स्वास्थ्य विभाग की निदेशक डॉ. शिखा जगपांगी ने इस व्यवस्था की जानकारी देते हुए बताया:
”मानसून के दौरान गर्भवती महिलाओं के लिए चुनौतियां बढ़ जाती हैं। इसे देखते हुए अक्टूबर तक की सूची तैयार कर मॉनिटरिंग सेल के जरिए हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की ट्रैकिंग की जा रही है। महिलाओं को समय-समय पर परामर्श दिया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर टेली-कंसल्टेंसी का सहारा भी लिया जा रहा है ताकि डिलीवरी डेट से पहले ही वे सुरक्षित स्थान पर पहुंच सकें।”
निष्कर्ष
उत्तराखंड सरकार का यह कदम पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से काफी राहत देने वाला है। इससे न केवल समय पर डॉक्टरी इलाज मिलना संभव होगा, बल्कि मानसून के दौर में जच्चा-बच्चा दोनों की जान का जोखिम भी कम होगा।
