धार भोजशाला मामला: वैकल्पिक जमीन पर नमाज को लेकर मुस्लिम पक्ष पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, सॉलिसिटर जनरल ने दिया सुधार का आश्वासन
धार भोजशाला मामला: वैकल्पिक जमीन पर नमाज को लेकर मुस्लिम पक्ष पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, सॉलिसिटर जनरल ने दिया सुधार का आश्वासन
नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमल मौला मस्जिद विवाद मामले में मुस्लिम पक्ष ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने प्रशासन द्वारा शुक्रवार की नमाज के लिए उपलब्ध कराई गई वैकल्पिक जमीन पर सख्त आपत्ति जताई है।
मुस्लिम पक्ष की मुख्य आपत्तियां
मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील हुजैफा अहमदी ने अदालत के समक्ष अपनी बात रखी:
भोजशाला से दूरी अधिक: वकील अहमदी ने तर्क दिया कि नमाज के लिए जो वैकल्पिक जमीन दी गई है, वह विवादित स्थल (भोजशाला परिसर) से लगभग 2 किलोमीटर दूर है। जबकि अदालत का निर्देश था कि नमाज के लिए स्थान भोजशाला के पास ही होना चाहिए।
एक शुक्रवार की नमाज छूटी: दूरी अधिक होने के कारण नमाजी वहां तक समय पर नहीं पहुंच सके, जिससे एक शुक्रवार की नमाज पहले ही छूट चुकी है। उन्होंने इस अंतरिम आवेदन पर तत्काल सुनवाई की मांग की।
अदालत की टिप्पणी और सॉलिसिटर जनरल का आश्वासन
जस्टिस जॉयमाल्या बागची की टिप्पणी: पीठ के सदस्य जस्टिस बागची ने स्पष्ट किया कि अदालत के आदेशों का पालन केवल कागजों पर नहीं, बल्कि “लैटर एंड स्पिरिट” यानी पूरी मंशा और भावना के साथ होना चाहिए।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का रुख: राज्य और केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह इस विषय को व्यक्तिगत रूप से देखेंगे और इसमें जो भी आवश्यक सुधार होंगे, उन्हें सुनिश्चित करेंगे।
अगली सुनवाई: मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले को शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
पृष्ठभूमि: 14 जुलाई का सुप्रीम कोर्ट का आदेश
इससे पूर्व 14 जुलाई को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने विवादित परिसर में नमाज जारी रखने की मांग पर एक अंतरिम व्यवस्था का सुझाव दिया था:
CJI सूर्यकांत ने सॉलिसिटर जनरल से पूछा था कि क्या नमाजियों के लिए भोजशाला परिसर के आसपास ही कोई खुली जगह उपलब्ध कराई जा सकती है।
अदालत का विचार था कि जब तक इस संवेदनशील मामले पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक पास ही के किसी स्थान पर अंतरिम व्यवस्था के तहत नमाज की अनुमति दी जा सकती है।
