अमेरिका ने ईरान पर लगातार 11वीं रात किए सैन्य हमले; जवाब में ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर दागीं मिसाइलें
अमेरिका ने ईरान पर लगातार 11वीं रात किए सैन्य हमले; जवाब में ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर दागीं मिसाइलें
वाशिंगटन/तेहरान: मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि अमेरिकी सेना ने मंगलवार शाम 8:15 बजे (अमेरिकी समय) ईरान के सैन्य ठिकानों पर लगातार 11वीं रात जोरदार हवाई हमले किए। दूसरी ओर, ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं।
अमेरिकी हवाई हमलों के मुख्य बिंदु
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यापारिक जहाजों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करना और ईरानी खतरों को खत्म करना है:
निशाने पर रहे प्रमुख ठिकाने: अमेरिकी हमलों में ईरान के सैन्य ऑपरेशन सेंटर, समुद्री सैन्य क्षमताएं, एयरक्राफ्ट हैंगर, ड्रोन स्टोरेज फैसिलिटीज और मिलिट्री लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह किया गया।
व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा: सेंटकॉम के अनुसार, पिछले तीन महीनों में ईरान ने अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्ग से गुजर रहे 30 से अधिक कमर्शियल वेसल्स पर हमले किए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य का संचालन: अमेरिका ने दावा किया कि ईरानी उकसावे के बावजूद यह मार्ग व्यापार के लिए खुला है। मई की शुरुआत से अब तक करीब 900 व्यावसायिक जहाजों और 450 मिलियन बैरल कच्चे तेल का सुरक्षित आवागमन कराया गया है।
ईरान की जवाबी कार्रवाई: अमेरिकी सैन्याड्डों पर दागे ड्रोन और मिसाइलें
अमेरिका के हमलों के तुरंत बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने आधिकारिक मीडिया नेटवर्क ‘सेपाह न्यूज’ के जरिए पलटवार की घोषणा की:
इन देशों में बने अमेरिकी ठिकाने बने निशाना: ईरान के एयरोस्पेस फोर्स ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम, रडार सेंटर, संचार नेटवर्क और अन्य बुनियादी सैन्य ढांचे पर हमले किए।
प्रमुख सैन्य अड्डे: ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने कुवैत में ‘कैंप अरिफजान’ व ‘अहमद अल-जाबेर एयर बेस’ और बहरीन में ‘शेख ईसा एयर बेस’ को निशाना बनाया।
आगे की चेतावनी: IRGC ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई हालिया अमेरिकी हमलों का माकूल जवाब है और क्षेत्र में अमेरिकी उपस्थिति के खिलाफ बड़े पैमाने पर मिसाइल/ड्रोन अभियानों की शुरुआत है।
