गर्भावस्था और प्रसव के बाद हल्का व्यायाम व योग मानसिक स्वास्थ्य के लिए वरदान: रिपोर्ट
गर्भावस्था और प्रसव के बाद हल्का व्यायाम व योग मानसिक स्वास्थ्य के लिए वरदान: अध्ययन
नई दिल्ली: गर्भावस्था और प्रसव के बाद का समय हर महिला के जीवन का एक खूबसूरत लेकिन संवेदनशील दौर होता है। इस दौरान शरीर में तेजी से होने वाले हार्मोनल बदलाव, थकान, नींद की कमी और शिशु की देखभाल की जिम्मेदारियों के कारण अक्सर महिलाएं तनाव, चिंता (एंग्जायटी) और अवसाद (डिप्रेशन) का शिकार हो जाती हैं। हाल ही में आए एक नए वैश्विक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि इस दौरान नियमित रूप से हल्की शारीरिक गतिविधि और योग करने से महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य में जबरदस्त सुधार होता है।
वर्ष 2014 से 2026 तक के 4,000 से अधिक अध्ययनों की समीक्षा
’फिजिकल एक्टिविटी एंड पेरिनेटल डिप्रेशन एंड एंग्जायटी: अ ग्लोबल अम्ब्रेला रिव्यू’ शीर्षक से प्रकाशित इस व्यापक शोध में शोधकर्ताओं ने पबमेड, एम्बेस, वेब ऑफ साइंस और कोक्रेन लाइब्रेरी जैसे दुनिया भर के प्रतिष्ठित मेडिकल डेटाबेस से वर्ष 2014 से अप्रैल 2026 तक प्रकाशित 4,109 अध्ययनों का विश्लेषण किया। कड़े मानकों के बाद 20 प्रमुख अध्ययनों को अंतिम समीक्षा में शामिल किया गया, जिनमें गर्भावस्था और प्रसवोत्तर (postpartum) चरण में व्यायाम के प्रभावों को गहराई से जांचा गया था।
अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष
अवसाद के लक्षणों में कमी: नियमित रूप से सक्रिय रहने वाली महिलाओं में डिप्रेशन के लक्षण काफी कम पाए गए। व्यायाम शरीर में सकारात्मक हार्मोन जारी करता है, जिससे मूड बेहतर रहता है।
योग और मानसिक शांति: शोध में योग को तनाव दूर करने और मानसिक स्थिरता बनाए रखने का एक बेहद कारगर माध्यम पाया गया है।
चिंता (एंग्जायटी) से राहत: शारीरिक गतिविधियों से चिंता के लक्षणों में भी गिरावट देखी गई है, हालांकि वैज्ञानिक इस पर और अधिक ठोस निष्कर्ष के लिए आगे शोध कर रहे हैं।
विशेषज्ञों की सलाह: टहलना और हल्का व्यायाम जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर महिलाएं प्रसव के बाद केवल अपने शारीरिक बदलावों पर ध्यान देती हैं और मानसिक समस्याओं को नजरअंदाज कर देती हैं। ऐसे समय में डॉक्टर की सलाह लेकर रोजाना थोड़ी देर टहलना (walk), हल्का योग या अपनी क्षमता अनुसार हल्की गतिविधियां करना मां और शिशु दोनों की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।
