राजनीति

राहुल गांधी, प्रियंका और अखिलेश समेत कई दिग्गज नेता 3 घंटे बाद पुलिस हिरासत से रिहा; सोनिया गांधी खुद पहुंचीं थाना

राहुल गांधी, प्रियंका और अखिलेश समेत कई दिग्गज नेता 3 घंटे बाद पुलिस हिरासत से रिहा; सोनिया गांधी खुद पहुंचीं थाना

​नई दिल्ली: नीट (NEET) परीक्षा विवाद और छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में प्रधानमंत्री आवास (लोक कल्याण मार्ग) के बाहर प्रदर्शन कर रहे प्रमुख विपक्षी नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लेने के बाद कागजी कार्रवाई पूरी कर रिहा कर दिया है। हिरासत में लिए गए नेताओं में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव समेत करीब 100 से 150 सांसद व वरिष्ठ नेता शामिल थे।

​शीर्ष अधिकारियों की इमरजेंसी मीटिंग, 3 घंटे बाद हुई रिहाई

​घटनाक्रम के दौरान दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और स्पेशल कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) देवेश श्रीवास्तव ने नई दिल्ली डीसीपी दफ्तर में सभी स्पेशल कमिश्नरों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक के बीच से कमिश्नर अनुराग कुमार निकल गए, लेकिन अन्य अधिकारियों की चर्चा जारी रही।

​लगभग तीन घंटे तक हिरासत में रखने के बाद दिल्ली पुलिस ने सभी नेताओं को औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर छोड़ दिया। रिहाई से ठीक पहले कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी खुद मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचीं, जहां प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं को रखा गया था।

​क्यों और किस कानून के तहत हुई कार्रवाई?

​दिल्ली पुलिस के अनुसार, विपक्षी नेताओं को ‘दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 65’ (65 DP Act) के तहत बुक और डिटेन किया गया था।

​क्या है धारा 65 (Delhi Police Act)?

इस कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति पुलिस अधिकारी द्वारा दिए गए वैध और उचित निर्देशों का उल्लंघन करता है, विरोध करता है या अनदेखी करता है, तो पुलिस अधिकारी के पास अधिकार होता है कि वह व्यक्ति को मौके से हटा दे और बिना वारंट के हिरासत में ले ले।

​”यह लोकतंत्र के लिए काला दिन” — सचिन पायलट का तीखा हमला

​नेताओं की रिहाई के बाद कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर जमकर निशाना साधा।

​प्रदर्शन का कारण: सचिन पायलट ने कहा कि विपक्ष युवाओं और छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के खिलाफ एकजुट हुआ था। सरकार का यह क्रूर चेहरा किसी को मंजूर नहीं है।

​राहुल गांधी के साथ व्यवहार: पायलट ने आरोप लगाया कि लोक कल्याण मार्ग पर जनता की आवाज उठा रहे राहुल गांधी के साथ पुलिस ने धक्का-मुक्की की और उन्हें जबरदस्ती घसीटा गया, जो बर्दाश्त के बाहर है।

​मुख्य मांगें: उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेना चाहिए, छात्रों पर दर्ज एफआईआर (FIR) वापस होनी चाहिए और पेपर लीक मामले पर सरकार को जवाब देना चाहिए।

​सचिन पायलट ने इस घटना को “लोकतंत्र के लिए काला दिन” करार देते हुए कहा कि जनता आक्रोशित है और विपक्ष न्याय की लड़ाई जारी रखेगा।

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