बदरीनाथ धाम दान चोरी मामला: गणेश गोदियाल और BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी आमने-सामने, थमा नहीं सियासी घमासान
बदरीनाथ धाम दान चोरी मामला: गणेश गोदियाल और BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी आमने-सामने, थमा नहीं सियासी घमासान
उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में हुए चढ़ावा/दान चोरी मामले ने अब एक बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। इस मामले के मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
बीते दिनों हेमंत द्विवेदी द्वारा लगाए गए आरोपों पर पलटवार करते हुए 20 जुलाई को गणेश गोदियाल ने देहरादून स्थित कांग्रेस मुख्यालय में एक प्रेस वार्ता की और कई बड़े खुलासे करते हुए सीधे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को कटघरे में खड़ा किया।
आरोपी प्रमोद नौटियाल को लेकर गणेश गोदियाल का पलटवार
बीकेटीसी (BKTC) अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने आरोप लगाया था कि मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल और गणेश गोदियाल के संबंध बहुत पुराने हैं। इस पर सफाई देते हुए गोदियाल ने कहा:
”प्रमोद नौटियाल मेरे बीकेटीसी का दायित्व ग्रहण करने (2003) से पहले से ही वहां कार्यरत था। उससे पहले मेरी प्रमोद नौटियाल से कोई व्यक्तिगत मुलाकात या परिचय नहीं था। जब इस बारे में गहन जानकारी जुटाई गई, तो पता चला कि प्रमोद नौटियाल असल में भाजपा शासनकाल के दौरान साल 2001 में कार्यरत रहे बदरी-केदार मंदिर समिति के तत्कालीन अध्यक्ष का सगा भतीजा है।”
— गणेश गोदियाल, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तराखंड कांग्रेस
”चोरी सिर्फ व्यक्तिगत हरकत नहीं, ऊपर से संचालित संगठित अपराध है”
गणेश गोदियाल ने प्रेस वार्ता में जांच के हवाले से एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में गिरफ्तार हुए दूसरे आरोपी और पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान ने पूछताछ में साफ किया है कि उसे सारे निर्देश प्रमोद नौटियाल से मिलते थे। वहीं, प्रमोद नौटियाल को सीधे समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी आदेश देते थे।
गोदियाल के अनुसार, यह बयान साबित करता है कि बदरीनाथ मंदिर में दान की चोरी कुछ छोटे कर्मचारियों की व्यक्तिगत हरकत नहीं, बल्कि शीर्ष स्तर से संचालित एक संगठित अपराध (Organized Crime) है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से दागे तीखे सवाल
गणेश गोदियाल ने इस पूरे प्रकरण को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की चुप्पी और कार्रवाई न किए जाने पर भी गंभीर सवाल उठाए:
अध्यक्ष को पद से क्यों नहीं हटाया?: गोदियाल ने पूछा कि इतने गंभीर आरोप और कड़ियों के जुड़ने के बाद भी बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी को पद से हटाकर निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराई जा रही है? उन्हें अब तक ‘पद का जीवनदान’ क्यों दिया गया है?
पुरानी बर्खास्तगी का हवाला: गोदियाल ने याद दिलाया कि साल 2011 में भाजपा सरकार के दौरान, तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी ने भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते इसी हेमंत द्विवेदी को तराई बीज निगम के अध्यक्ष पद से हटाया था। समाचार पत्रों में भी यह खबर प्रमुखता से छपी थी। ऐसे में एक दागी व्यक्ति को मंदिर समिति जैसे सम्मानित पद पर दोबारा बैठाने के पीछे मुख्यमंत्री का क्या हित (Interest) है?
गोदियाल ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि वे इस मुद्दे पर किसी भी मंच पर बहस करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री इस मामले पर तत्काल कड़ा निर्णय लें, अन्यथा जनता के सामने आकर खुद इस पर स्पष्टीकरण दें।
