उत्तराखंड

अंकिता भंडारी हत्याकांड: हाईकोर्ट से पुलकित आर्य और सौरभ भास्कर को झटका, जमानत याचिका पर राहत नहीं

अंकिता भंडारी हत्याकांड: हाईकोर्ट से पुलकित आर्य और सौरभ भास्कर को झटका, जमानत याचिका पर राहत नहीं

​उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड के दोषियों को उत्तराखंड हाईकोर्ट से सोमवार (20 जुलाई) को कोई राहत नहीं मिली। निचली अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को चुनौती देने और जमानत पर रिहा करने की दोषियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने अगली तारीख तय कर दी है।

​हाईकोर्ट की सुनवाई और कोर्ट का रुख

​न्यायाधीश रविन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खण्डपीठ ने दोषी पुलकित आर्य और सौरभ भास्कर की याचिकाओं पर सुनवाई की।

​कोई तात्कालिक राहत नहीं: कोर्ट ने दोनों दोषियों की जमानत याचिका पर फिलहाल उन्हें कोई राहत देने से इनकार कर दिया।

​अगली सुनवाई की तिथि: कोर्ट ने इस मामले में विस्तृत सुनवाई के लिए 10 अगस्त की तिथि नियत की है।

​पीड़ित पक्ष की आपत्ति और ‘मेमो ऑफ अपील’ की डिलीवरी

​सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष के वकीलों ने कोर्ट के सामने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक चूक का मुद्दा उठाया।

​पीड़ित पक्ष की दलील: “दोषियों की तरफ से हाईकोर्ट में जो अपील दायर की गई है, उसकी कॉपी (Memo of Appeal) आज तक हमें उपलब्ध नहीं कराई गई थी। जब तक हमें यह नहीं पता होगा कि दोषियों ने अपने बचाव में कौन से तथ्य और तर्क न्यायालय के सामने रखे हैं, तब तक हम पीड़िता का पक्ष प्रभावी ढंग से कैसे रख पाएंगे? इसलिए हमें शीघ्र इसकी कॉपी दिलाई जाए।”

​पीड़ित पक्ष की इस मांग को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने निर्देश दिए, जिसके बाद आज ही पीड़ित पक्ष को ‘मेमो ऑफ अपील’ की कॉपी सौंप दी गई। अब पीड़ित पक्ष 10 अगस्त को होने वाली सुनवाई में दोषियों के तर्कों का जवाब मजबूती से दे सकेगा।

​क्या है पूरा मामला? (केस बैकग्राउंड)

​घटना: पौड़ी जिले के डोभ श्रीकोट की रहने वाली अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास ‘वनंत्रा रिसोर्ट’ में नौकरी करती थी।

​अपराध: रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य ने अपने साथियों सौरभ भास्कर और अंकित के साथ मिलकर अंकिता को चीला बैराज में धक्का दे दिया था, जिससे डूबने के कारण उसकी मौत हो गई थी।

​सजा: पुलिस जांच और पुख्ता गवाहों के आधार पर कोटद्वार की निचली अदालत ने पुलकित आर्य और सौरभ भास्कर को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की सजा सुनाई थी। तब से दोनों दोषी जेल में बंद हैं और इसी सजा को रद्द कराने व जमानत पाने के लिए उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

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