अन्तर्राष्ट्रीय

अमेरिका में F-1 और J-1 वीजा के नए नियमों से हड़कंप, इंटरनेशनल स्टूडेंट्स की पढ़ाई और रिसर्च पर संकट

अमेरिका में F-1 और J-1 वीजा के नए नियमों से हड़कंप, इंटरनेशनल स्टूडेंट्स की पढ़ाई और रिसर्च पर संकट

​अमेरिका में F-1 और J-1 वीजा धारक अंतरराष्ट्रीय छात्रों के रहने की अवधि को अधिकतम 4 साल तक सीमित करने वाले नए नियम के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। इंडियन डायस्पोरा पॉलिसी ग्रुप ‘फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज’ (FIIDS) ने चेतावनी दी है कि इस नए नियम के कारण विदेशी छात्रों को अपनी डिग्री या रिसर्च के बीच में ही अमेरिका छोड़कर जाना पड़ सकता है।

​संगठन ने अमेरिकी जनप्रतिनिधियों और अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) से गृह सुरक्षा विभाग (DHS) के इस नए नियम पर तत्काल रोक लगाने की अपील की है। 16-17 जुलाई को अंतिम रूप दिया गया यह नियम सितंबर के मध्य से लागू होने वाला है।

​बरसों पुरानी ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ नीति खत्म

​नए नियम के तहत वर्षों से चली आ रही ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ नीति को समाप्त कर दिया गया है, जो छात्रों को उनकी पढ़ाई पूरी होने तक अमेरिका में रहने की अनुमति देती थी। अब अधिकतम 4 साल की समय-सीमा तय कर दी गई है, जिसमें ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) और STEM OPT की अवधि को भी शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, पढ़ाई पूरी होने के बाद मिलने वाली 60 दिनों की ग्रेस पीरियड को घटाकर 30 दिन कर दिया गया है। अब किसी भी तरह के वीजा विस्तार के लिए छात्रों को फॉर्म I-539 के जरिए USCIS से पहले मंजूरी लेनी होगी।

​अमेरिकी रिसर्च और इनोवेशन को लगेगा झटका

​FIIDS में नीति और रणनीति के प्रमुख खंडेराव कंद ने इसे अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मकता (Competitiveness) पर खुद से किया गया घाव बताया है। उन्होंने कहा:

​”4 साल की यह लिमिट आधुनिक डिग्रियों के समय से मेल नहीं खाती। अमेरिका में ग्रेजुएशन (बैचलर) पूरा करने का औसत समय लगभग 52 महीने और पीएचडी के लिए करीब 5.7 साल है। ऐसे में छात्रों को रिसर्च के बीच से ही बाहर कर दिया जाएगा, जिससे अमेरिकी लैब्स जरूरी टैलेंट खो देंगी और अमेरिका अपनी इनोवेशन पाइपलाइन प्रतिस्पर्धी देशों को सौंप देगा।”

​उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि USCIS के पास पहले से ही 11 मिलियन (1.1 करोड़) से अधिक मामले लंबित हैं, जिनकी प्रोसेसिंग में करीब एक साल का समय लगता है। ऐसे में वीजा एक्सटेंशन की अनिश्चितता लैब्स के काम में रुकावट डालेगी और फैकल्टी रिक्रूटमेंट प्लान को अस्थिर करेगी।

​FIIDS ने की प्रशासनिक राहत की मांग

​संगठन ने अमेरिकी कांग्रेस से F-1 और J-1 वीजा धारकों के लिए ‘ड्यूरेशन-ऑफ-स्टेटस’ सुरक्षा को फिर से बहाल करने की मांग की है। साथ ही, USCIS और गृह सुरक्षा विभाग से अपील की है कि नए नियम को लागू करने से पहले छात्रों को निम्नलिखित राहत दी जाए:

​अच्छी स्थिति में पढ़ाई कर रहे छात्रों को स्वतः (स्वचालित) वीजा एक्सटेंशन मिले।

​4 साल की अधिकतम अवधि की गणना से OPT और STEM OPT को बाहर रखा जाए।

​फॉर्म I-539 आवेदनों का तेजी से निपटारा किया जाए।

​पढ़ाई खत्म होने के बाद मिलने वाली 60 दिनों की ग्रेस पीरियड को दोबारा बहाल किया जाए।

​अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान

​FIIDS के अनुसार, नियमों में कड़ाई के चलते साल 2025 के फॉल सेमेस्टर में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नए दाखिलों में 17 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो कोरोना महामारी के बाद सबसे बड़ी कमी है। इस गिरावट के कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था को 1.1 अरब डॉलर से अधिक के राजस्व का नुकसान हुआ है और करीब 23,000 नौकरियों पर इसका सीधा असर पड़ा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *