दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: सोनम वांगचुक को प्राइवेट अस्पताल शिफ्ट करने की याचिका खारिज, सफदरजंग में ही जारी रहेगा इलाज
दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: सोनम वांगचुक को प्राइवेट अस्पताल शिफ्ट करने की याचिका खारिज, सफदरजंग में ही जारी रहेगा इलाज
नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को किसी निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो द्वारा दायर याचिका पर करीब सवा घंटे चली मैराथन सुनवाई के बाद सरकार के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने मामले में कोई अंतरिम राहत नहीं दी, जिसके चलते पिछले तीन हफ्तों से अनशन कर रहे सोनम वांगचुक फिलहाल दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में ही भर्ती रहेंगे।
अदालत में जोरदार बहस: ‘माय बॉडी, माय चॉइस’ बनाम ‘राष्ट्रपति भी सरकारी में कराते हैं इलाज’
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिली:
याचिकाकर्ता (कपिल सिब्बल की दलील): सोनम वांगचुक की पत्नी का पक्ष रख रहे देश के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने ‘माय बॉडी, माय चॉइस’ (मेरा शरीर, मेरी पसंद) की दलील दी। उन्होंने कहा कि यह वांगचुक का शरीर है और उन्हें पूरा अधिकार है कि वे किस डॉक्टर या अस्पताल की निगरानी में रहना चाहते हैं। उन्होंने मांग की कि वांगचुक को तुरंत मेदांता अस्पताल शिफ्ट करने की अनुमति दी जाए, क्योंकि सफदरजंग अस्पताल में वकीलों और डॉक्टरों की पहुंच सीमित है।
सरकार का पक्ष (एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा): सरकार की तरफ से पक्ष रख रहे एएसजी चेतन शर्मा ने इन आरोपों का खंडन किया और कहा कि सफदरजंग अस्पताल में वांगचुक के परिवार और उनकी पत्नी को पूरी पहुंच (फुल एक्सेस) दी गई है। उन्होंने सरकारी व्यवस्था का बचाव करते हुए कहा, “भारत के महामहिम राष्ट्रपति भी सरकारी अस्पताल से ही अपना इलाज करवाते हैं।” ऐसे में किसी खास प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग का कोई ठोस आधार नहीं है।
हाई कोर्ट का सवाल: वांगचुक को अस्पताल में रखने की क्या थी मजबूरी?
अदालत ने जब सरकार से पूछा कि वांगचुक को जंतर-मंतर से उठाकर जबरन अस्पताल में भर्ती कराने की क्या तत्परता थी, तो एएसजी और डॉक्टरों की टीम ने उनके गिरते स्वास्थ्य का हवाला दिया:
किडनी खराब होने का खतरा: एएसजी ने बताया कि उमस भरे इस मौसम में 18 दिनों से अधिक समय तक लगातार उपवास करने की वजह से वांगचुक का शरीर गंभीर रूप से डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) का शिकार हो चुका था।
कीटोसिस की स्थिति: लंबे उपवास के कारण उनके शरीर में ‘कीटोसिस’ की स्थिति बन गई थी और पोटैशियम का स्तर खतरनाक रूप से कम हो रहा था। यदि उन्हें तुरंत चिकित्सकीय देखरेख में नहीं लाया जाता, तो उनकी किडनी काम करना बंद कर सकती थी।
निष्पक्ष ब्लड टेस्ट: कोर्ट के पूछने पर सरकार ने साफ किया कि वांगचुक के ब्लड सैंपल की जांच सफदरजंग, एम्स (AIIMS), महाजन लैब और एक अन्य प्राइवेट लैब से कराई गई है, इसलिए रिपोर्ट पर शक की कोई गुंजाइश नहीं है।
दवा और ड्रिप लेने से वांगचुक का इनकार
कोर्ट में पेश हुए एम्स (AIIMS) के डॉक्टरों ने वांगचुक की स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि वे इलाज में सहयोग नहीं कर रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, वांगचुक नस के जरिए (ड्रिप) कोई भी दवा या फ्लूइड लेने से मना कर रहे हैं। वे शुगर या विटामिन वाले सप्लीमेंट भी नहीं ले रहे हैं। गंभीर डिहाइड्रेशन और कीटोसिस की स्थिति को देखते हुए उन्हें कार्बोहाइड्रेट की सख्त जरूरत है, लेकिन फिलहाल उन्हें केवल बिना चीनी वाली कुछ ओरल दवाएं और बिना शुगर वाला ओआरएस (ORS) ही दिया जा सका है।
क्यों अदालत पहुंची थीं वांगचुक की पत्नी?
18 जुलाई की तड़के सुबह दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को उठाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि का आरोप था कि यह एक ‘अवैध हिरासत’ जैसा है और उनका सफदरजंग अस्पताल की व्यवस्था से भरोसा उठ गया है, इसलिए वे उन्हें अपनी पसंद के निजी अस्पताल में ले जाना चाहती थीं। हालांकि, हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें देश के अन्य नागरिकों की तरह सरकारी डॉक्टरों और पूर्व के न्यायिक निर्देशों पर भरोसा रखना होगा।
