उत्तराखंड

​’The Loom Collective’ का समापन: उत्तराखंड की प्रथम महिला गुरमीत कौर ने की शिरकत, बोलीं— “हथकरघा के पीछे के हाथों को मजबूत करना होगा”

​’The Loom Collective’ का समापन: उत्तराखंड की प्रथम महिला गुरमीत कौर ने की शिरकत, बोलीं— “हथकरघा के पीछे के हाथों को मजबूत करना होगा”

​देहरादून: आर्याना क्रिएशंस द्वारा देहरादून में आयोजित दो दिवसीय हैंडलूम एवं एथनिक फैशन उत्सव ‘The Loom Collective’ का रविवार (05 जुलाई 2026) को भव्य समापन हो गया। उत्सव के दूसरे एवं अंतिम दिन उत्तराखंड की प्रथम महिला (फर्स्ट लेडी) गुरमीत कौर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम के अंतिम चरण का विधिवत शुभारंभ किया और वहां लगाए गए विभिन्न हैंडलूम उत्पादों की प्रदर्शनी का बारीकी से अवलोकन किया।

​”मेहनत के अनुरूप मजदूरी न मिलना चिंता का विषय”

​समारोह को संबोधित करते हुए फर्स्ट लेडी गुरमीत कौर ने भारतीय संस्कृति में हथकरघा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा:

​”हैंडलूम भारत की अनमोल विरासत है और इसे हर हाल में बचाने की जरूरत है। आज के समय में लोग इस कला से दूर जा रहे हैं, क्योंकि इसमें अत्यधिक मेहनत लगती है और उस मेहनत के अनुसार कारीगरों को उनकी मजदूरी नहीं मिल पाती। हमें हथकरघा के पीछे काम करने वाले उन अदृश्य हाथों को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत करना होगा।”

​उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ऐसे आयोजनों को केवल शहरों तक सीमित न रखकर गांवों तक ले जाना चाहिए और ग्रामीण कारीगरों को भी इसमें शामिल करना चाहिए।

​बुनकरों और स्थानीय शिल्प को वैश्विक पहचान दिलाने का संकल्प

​आर्याना क्रिएशंस की ओर से रश्मि बर्द्धन ने हथकरघा कला के संवर्धन पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प इस कला को सिर्फ संरक्षित करने का नहीं, बल्कि इसे और अधिक समृद्ध बनाने का होना चाहिए। इस दो दिवसीय कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय हस्तकरघा की समृद्ध विरासत से नई पीढ़ी को रूबरू कराना और स्थानीय बुनकरों व कारीगरों को एक मजबूत मंच प्रदान करना है, ताकि स्थानीय शिल्प को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिल सके।

​पैनल डिस्कशन: कारीगरों की आजीविका के लिए ‘ईको सिस्टम’ बनाने पर जोर

​उत्सव के दूसरे दिन का मुख्य आकर्षण एक उच्च स्तरीय ‘पैनल डिस्कशन’ (परिचर्चा) रहा। इसमें शामिल विषय-विशेषज्ञों और पैनलिस्टों ने हथकरघा व हस्तशिल्प कला से जुड़े लोगों की आजीविका और उनकी व्यावहारिक समस्याओं पर सार्थक चर्चा की।

​पैनल ने सुझाव दिया कि भारतीय हस्तशिल्प को जीवित रखने के लिए एक मजबूत ‘ईको सिस्टम’ विकसित करना होगा। इसके तहत:

​इस उद्योग से जुड़े कच्चे माल (जैसे ऊन) के उत्पादक पशुपालकों को उनके मवेशियों के लिए उचित मेडिकल सुविधाएं दी जाएं।

​बुनकर परिवारों के बच्चों के लिए आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए ताकि वे नई तकनीकों के साथ इस पारंपरिक व्यवसाय को आगे बढ़ा सकें।

​हर-हर महादेव और पारंपरिक कलाओं के प्रोत्साहन के संकल्प के साथ इस दो दिवसीय फैशन और शिल्प उत्सव का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

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