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बिहार की राजनीति में बड़ा भूचाल: प्रशांत किशोर बांकीपुर से लड़ेंगे पहला विधानसभा चुनाव, बढ़ सकती है भाजपा की मुश्किलें

बिहार की राजनीति में बड़ा भूचाल: प्रशांत किशोर बांकीपुर से लड़ेंगे पहला विधानसभा चुनाव, बढ़ सकती है भाजपा की मुश्किलें

​पटना: बिहार की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। जन सुराज के संस्थापक और प्रख्यात चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (PK) ने पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। यह प्रशांत किशोर की सक्रिय चुनावी राजनीति में पहली एंट्री (डेब्यू) है। यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है, जिसके चलते यहां आगामी 30 जुलाई को मतदान होना है।

​जन सुराज कोर कमेटी का फैसला: “242 विधायकों पर भारी पड़ेंगे पीके”

​पटना में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन (Press Conference) में जन सुराज की ओर से प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी का एलान किया गया। जन सुराज के नेताओं ने बताया कि बांकीपुर की जनता की राय और स्थानीय निर्णय के बाद कोर कमेटी की बैठक में यह तय किया गया है कि इस सीट से खुद प्रशांत किशोर चुनावी मैदान में उतरेंगे।

​उम्मीदवारी की घोषणा के बाद प्रशांत किशोर ने हुंकार भरते हुए कहा:

​”अगर आप जन सुराज के एक प्रतिनिधि को चुनकर सदन में भेजते हैं, तो हम वहां बाकी के 242 विधायकों पर भारी पड़ेंगे। हम जनता की उम्मीदों का बोझ अपने कंधों पर उठाकर उनका मजबूती से प्रतिनिधित्व करेंगे।”

​क्या ढहेगा भाजपा का गढ़? विपक्ष दे सकता है वॉकओवर!

​बांकीपुर विधानसभा सीट को पारंपरिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का अभेद्य किला माना जाता है। नितिन नवीन यहां से लगातार पांच बार विधायक रह चुके हैं। उनके इस्तीफे के बाद बीजेपी के लिए यह सीट साख और प्रतिष्ठा का सवाल बन चुकी है। हालांकि, प्रशांत किशोर के मैदान में आने से समीकरण पूरी तरह बदलते दिख रहे हैं।

​राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और अन्य विपक्षी दल इस सीट पर अपना कोई उम्मीदवार न उतारकर प्रशांत किशोर को गुप्त या प्रत्यक्ष रूप से समर्थन दे सकते हैं। इस बात के साफ संकेत रविवार को कांग्रेस नेता ऋषि मिश्रा के बयान से भी मिले हैं। यदि महागठबंधन पीके का समर्थन करता है, तो भाजपा के इस गढ़ में एनडीए की राह बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगी।

​पहली बार चुनावी मैदान में उतर रहे हैं पीके

​यह पहला मौका है जब प्रशांत किशोर खुद ‘किंगमेकर’ की भूमिका से बाहर निकलकर ‘किंग’ बनने की रेस में शामिल हुए हैं। इससे पहले पिछले साल हुए चुनावों के दौरान भी उनके तेजस्वी यादव के क्षेत्र राघोपुर या उनके खुद के गृह क्षेत्र करगहर से चुनाव लड़ने की अटकलें तेज थीं, लेकिन तब उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा था।

​फिलहाल, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) यानी भाजपा ने इस सीट पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं और उम्मीदवार के नाम का एलान होना अभी बाकी है। 30 जुलाई को होने वाले इस चुनावी दंगल पर अब पूरे देश की नजरें टिक गई हैं।

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