Monday, June 29, 2026
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सरला भट्ट हत्याकांड: 36 साल बाद आया न्याय का मोड़, यासीन मलिक मास्टरमाइंड घोषित; SIA ने पेश की 737 पन्नों की चार्जशीट

सरला भट्ट हत्याकांड: 36 साल बाद आया न्याय का मोड़, यासीन मलिक मास्टरमाइंड घोषित; SIA ने पेश की 737 पन्नों की चार्जशीट

​श्रीनगर (कश्मीर): कश्मीरी पंडितों के दर्द और उनके खिलाफ हुए अत्याचार के इतिहास में 29 जून 2026 का दिन बेहद महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। साल 1990 में घाटी में आतंकवाद के चरम दौर के दौरान बेरहमी से मौत के घाट उतारी गईं कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट के मामले में पूरे 36 साल बाद न्याय की उम्मीद जगी है।

​जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने श्रीनगर की एक विशेष TADA/POTA अदालत में 737 पन्नों की एक बेहद विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में जेल में बंद जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के खूंखार आतंकी चीफ यासीन मलिक को सरला भट्ट के अपहरण, प्रताड़ना (टॉर्चर) और हत्या का मुख्य मास्टरमाइंड (साजिशकर्ता) नामजद किया गया है। मीडिया आउटलेट NDTV को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, इस चार्जशीट में कश्मीरी पंडितों के जबरन पलायन और उनके खिलाफ रची गई खौफनाक आतंकी साजिशों के कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

​कौन थीं वीर नर्स सरला भट्ट?

​18 अप्रैल 1990 की सुबह, श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में कार्यरत स्टाफ नर्स सरला भट्ट का अस्पताल के पास से ही JKLF के आतंकियों ने अपहरण कर लिया था। इसके बाद उन्हें बुरी तरह प्रताड़ित किया गया और उमर कॉलोनी (मालबाग) में एक ऑटोमैटिक राइफल से अंधाधुंध गोलियां मारकर उनकी हत्या कर दी गई।

​जब साल 1990 की शुरुआत में घाटी के भीतर कश्मीरी पंडितों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा था और पूरा समुदाय अपनी जान बचाकर पलायन कर रहा था, तब भी सरला भट्ट ने लगातार मिल रही धमकियों के बावजूद अपनी ड्यूटी और कश्मीर को छोड़ने से साफ इनकार कर दिया था। वे घाटी में डटी रहने वाली आखिरी कुछ कश्मीरी पंडित महिलाओं में से एक थीं।

​यासीन मलिक ने क्यों दिया था हत्या का आदेश?

​जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, SKIMS का सौरा इलाका उस समय JKLF आतंकियों का मुख्य गढ़ हुआ करता था। सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में घायल होने वाले आतंकवादियों को अक्सर इलाज के लिए इसी अस्पताल में लाया जाता था, जहां नर्स होने के नाते सरला भट्ट का उनसे सामना होता था। आतंकियों को शक था कि सरला भट्ट एक मुखबिर हैं जो पुलिस या खुफिया एजेंसियों को उनके बारे में जानकारी दे सकती हैं।

​मनगढ़ंत था मुखबिरी का आरोप:

8 अप्रैल 1990 को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने खुफिया इनपुट के आधार पर नरवारा में छापा मारकर JKLF के कई बड़े आतंकियों को गिरफ्तार किया था। इस दौरान यासीन मलिक वहां से भागने में सफल रहा, लेकिन वह घायल हो गया था। मलिक को बिना किसी सबूत के यह वहम हो गया कि पुलिस को यह जानकारी सरला भट्ट ने ही लीक की थी। SIA की चार्जशीट में स्पष्ट किया गया है कि सरला भट्ट पर मुखबिर होने का आरोप ‘पूरी तरह से झूठा और मनगढ़ंत’ था, जिसका सहारा केवल एक सोची-समझी हत्या को सही ठहराने और पंडितों में खौफ पैदा करने के लिए लिया गया था।

​खामोशी की दीवार तोड़कर दो महिला IPS अफसरों ने खड़ी की पुख्ता केस फाइल

​इस ठंडे बस्ते में जा चुके केस को मार्च 2024 में जम्मू-कश्मीर के डीजीपी के आदेश पर SIA को सौंपा गया था। करीब साढ़े तीन दशकों के बाद गवाहों को तलाशना बेहद चुनौतीपूर्ण था क्योंकि अधिकांश गवाह अब 70 से 80 वर्ष के बुजुर्ग हो चुके थे और न्याय प्रणाली से उनका भरोसा उठ चुका था।

​नीतीश कुमार (ADG, CID/SIA): इनकी कुशल देखरेख में इस पूरी जटिल जांच को दिशा दी गई।

​दिव्या देव (SP, SIA): साल 2018 बैच की इस युवा महिला IPS अधिकारी (मूल रूप से तमिलनाडु की निवासी) को इस पूरी गहरी साजिश का पर्दाफाश करने और कोर्ट के लिए अभेद्य केस फाइल तैयार करने का मुख्य श्रेय जाता है। उन्होंने बुजुर्ग गवाहों और पीड़ित परिवारों के घर-घर जाकर उनका भरोसा जीता और साक्ष्य जुटाए।

​चार्जशीट में शामिल अन्य आरोपियों के नाम

​इस केस में यासीन मलिक के अलावा अन्य आतंकियों को भी नामजद किया गया है:

​खुर्शीद अहमद चालकू: इसकी पहचान उस शूटर के रूप में हुई है जिसने सरला भट्ट पर गोली चलाई थी। (वर्तमान में इसके पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में छिपे होने की आशंका है, जिसके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है)।

​अब्दुल हामिद शेख (मृत्यु हो चुकी है)

​मोहम्मद यूसुफ सूफी उर्फ इदरीस (मृत्यु हो चुकी है)

​गुलाम मोहम्मद टपलू (मृत्यु हो चुकी है)

​यासीन मलिक वर्तमान में टेरर फंडिंग के एक अन्य मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है।

​वैज्ञानिक साक्ष्य और ‘बिट्टा कराटे’ का वीडियो बना मुख्य हथियार

​SIA ने अदालत के सामने केवल मौखिक गवाह ही नहीं, बल्कि अचूक वैज्ञानिक और इलेक्ट्रॉनिक सबूत पेश किए हैं:

​बैलिस्टिक रिपोर्ट: घटनास्थल से बरामद 7.62 × 39 mm राइफल के तीनों कारतूसों के खोलों की वैज्ञानिक जांच से पुष्टि हुई कि वे एक ही ऑटोमैटिक हथियार से बर्स्ट फायर (लगातार गोलीबारी) के जरिए चलाए गए थे।

​फारूक अहमद डार उर्फ ‘बिट्टा कराटे’ का इंटरव्यू: पुलिस ने बिट्टा कराटे के उस चर्चित टीवी इंटरव्यू को इंडियन एविडेंस एक्ट की धारा 65-B के तहत कानूनी सर्टिफिकेट के साथ रिकॉर्ड पर लिया है, जिसमें उसने JKLF के शीर्ष नेतृत्व के इशारे पर कश्मीरी पंडितों की टारगेटेड हत्याएं करने की बात कबूली थी। यह सबूत दर्शाता है कि ये हत्याएं एक सुनियोजित कमांड स्ट्रक्चर के तहत की जा रही थीं।

​अन्य अनसुलझे मामलों के भी खुलेंगे राज

​सरला भट्ट मामले की गहराई से हुई इस जांच ने कश्मीर के कई अन्य ऐतिहासिक और अनसुलझे हत्याकांडों की कड़ियों को भी जोड़ दिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस केस से मिले नए इनपुट्स और गवाहों के आधार पर अब जस्टिस नीलकंठ गंजू, वकील टिक्का लाल टपलू और प्रसिद्ध कवि सरवानंद कौल प्रेमी की हत्या की साजिशों की फाइलें भी दोबारा खोली जाएंगी और जल्द ही उन मामलों में भी नई चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।

​दशकों के डर, दर्द और प्रशासनिक उदासीनता के बाद सरला भट्ट के परिवार और विस्थापित कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए कानून का यह कदम न्याय की एक नई किरण लेकर आया है।

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