नई गाड़ी खरीदने के बाद क्या तुरंत बनवाना पड़ता है PUC? जानें प्रदूषण सर्टिफिकेट से जुड़े ये जरूरी नियम
नई गाड़ी खरीदने के बाद क्या तुरंत बनवाना पड़ता है PUC? जानें प्रदूषण सर्टिफिकेट से जुड़े ये जरूरी नियम
नई दिल्ली: घर पर नई गाड़ी लाने की खुशी और उत्साह अलग ही होता है। लेकिन अक्सर इस उत्साह में कई नए वाहन मालिक गाड़ी से जुड़े जरूरी नियमों और कागजी कार्रवाई को लेकर असमंजस में रहते हैं। सबसे बड़ा भ्रम इस बात को लेकर होता है कि क्या शोरूम से गाड़ी निकालते ही उसका पॉल्यूशन सर्टिफिकेट (PUC – Pollution Under Control) बनवाना जरूरी है? अगर आप भी इस बात को लेकर कन्फ्यूज हैं, तो आइए नियमों को विस्तार से समझते हैं ताकि आप किसी भी भारी जुर्माने से बच सकें।
क्या नई गाड़ी के लिए तुरंत PUC बनवाना जरूरी है?
इसका सीधा जवाब है ‘नहीं’। जब आप कोई नई कार या बाइक खरीदते हैं, तो आपको तुरंत प्रदूषण टेस्ट करवाने की कोई जरूरत नहीं होती। भारत सरकार के केंद्रीय मोटर वाहन नियम (CMVR, 1989) के तहत नए वाहनों को शुरुआत में इससे विशेष छूट दी गई है।
नई गाड़ी का PUC कितने दिन तक वैध रहता है?
वाहन निर्माता कंपनियां गाड़ी को शोरूम में भेजने से पहले ही कड़े प्रदूषण मानकों पर उसकी पूरी टेस्टिंग करती हैं। यही वजह है कि नई गाड़ी के रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) की तारीख से लेकर पूरे 1 साल (12 महीने) तक, कंपनी द्वारा दिया गया इन-बिल्ट प्रदूषण सर्टिफिकेट ही पूरी तरह से वैध माना जाता है। यानी शुरुआती एक साल तक आपको किसी भी पीयूसी सेंटर के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।
एक साल पूरा होने के बाद क्या करें?
जैसे ही आपकी गाड़ी को सड़क पर उतरे 1 साल पूरा हो जाता है, कंपनी की ओर से मिलने वाली शुरुआती छूट समाप्त हो जाती है।
इसके बाद आपको अपने नजदीकी अधिकृत पीयूसी सेंटर पर जाकर गाड़ी की प्रदूषण जांच करवानी होगी।
सर्टिफिकेट की वैलिडिटी: एक साल से पुरानी गाड़ियों के लिए पीयूसी सर्टिफिकेट की वैधता आमतौर पर 6 महीने की होती है।
BS4 और BS6 वाहनों को लाभ: यदि आपकी गाड़ी नए प्रदूषण मानकों वाली यानी BS4 या BS6 श्रेणी की है, तो कई राज्यों में इसका प्रदूषण सर्टिफिकेट एक बार में सीधे 1 साल के लिए रिन्यू (नवीनीकृत) कर दिया जाता है।
PUC न होने पर कितना है जुर्माना और सजा?
अगर आप समय पर पीयूसी रिन्यू कराना भूल जाते हैं या बिना वैध प्रदूषण प्रमाण पत्र के सड़क पर गाड़ी चलाते हुए पकड़े जाते हैं, तो मोटर व्हीकल एक्ट के तहत आपको बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है:
भारी चालान: बिना वैलिड पीयूसी के पकड़े जाने पर 10,000 रुपये तक का भारी जुर्माना (चालान) किया जा सकता है।
लाइसेंस सस्पेंशन: ट्रैफिक पुलिस नियमों के उल्लंघन के आरोप में आपका ड्राइविंग लाइसेंस भी 3 महीने के लिए सस्पेंड (निलंबित) कर सकती है।
काम की बात: एक छोटा सा कागज आपको बड़े कानूनी झंझटों और भारी-भरकम जुर्माने से बचा सकता है। इसलिए, अपनी नई गाड़ी का 1 साल पूरा होते ही उसका प्रदूषण प्रमाणपत्र जरूर रिन्यू करवा लें और सुरक्षित ड्राइविंग का आनंद लें।
