बेअदबी कानून विवाद: अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए पंजाब के 38 सिख विधायक और मंत्री; कानून पर लगी रोक, सरकार को मिला 1 महीने का समय
बेअदबी कानून विवाद: अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए पंजाब के 38 सिख विधायक और मंत्री; कानून पर लगी रोक, सरकार को मिला 1 महीने का समय
अमृतसर: पंजाब के नए बेअदबी विरोधी कानून को लेकर चल रहा विवाद अब एक बड़े धार्मिक और राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गया है। सोमवार (29 जून 2026) को अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज के निर्देश पर पंजाब सरकार के 9 सिख कैबिनेट मंत्री और 29 सिख विधायक (कुल 38 नेता) अमृतसर स्थित श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश हुए।
इस दौरान अकाल तख्त ने कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब सरकार को अपनी आपत्तियां दूर करने के लिए एक महीने का समय दिया है। साथ ही, जब तक इस कानून में जरूरी संशोधन नहीं हो जाते, तब तक इस कानून के क्रियान्वयन पर रोक (होल्ड) लगा दी गई है।
”सरकार ने संप्रदाय के अधिकार में दखल दिया” — अकाल तख्त
सुनवाई के दौरान जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर तीखा रुख अपनाया। उन्होंने कहा:
”हमें इस कानून पर सख्त आपत्ति है। आपने वह काम अपने हाथ में लेने की कोशिश की है जो वास्तव में सिख संप्रदाय और अकाल तख्त साहिब के अधिकार क्षेत्र में आता है। बेअदबी कानून के जरिए सरकार गुरु और सिखों के बीच आने का प्रयास कर रही है। जब यह बिल विधानसभा में लाया गया था, मैंने उसी दिन कहा था कि सरकार गलती कर गई है।”
जत्थेदार ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने इस संबंध में विधानसभा स्पीकर को बुलाकर 15 दिनों में ऐतराज दूर करने को कहा था, लेकिन सरकार ने इसे अनसुना कर दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब उन्होंने पेश हुए कई विधायकों से पूछा कि क्या उन्होंने खुद यह कानून पढ़ा है, तो उन्होंने माना कि उन्होंने इसे पढ़ा ही नहीं था।
अकाल तख्त के मुख्य निर्देश और अल्टीमेटम
एक महीने की मोहलत: पंजाब सरकार को कानून की विवादित धाराओं को सिख पंथ की भावनाओं के अनुरूप बदलने के लिए 1 महीने का समय दिया गया है।
विशेष सत्र बुलाने का आदेश: जत्थेदार ने निर्देश दिया है कि यदि इन चिंताओं के समाधान के लिए पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र भी बुलाना पड़े, तो सरकार को वह बुलाना चाहिए।
लिखित स्पष्टीकरण: पेश हुए सभी सिख मंत्रियों और विधायकों ने अपनी राय लिखित रूप में प्रस्तुत की। वहीं, गैर-सिख मंत्रियों को 29 जून से पहले लिखित विचार भेजने को कहा गया था। मुख्यमंत्री भगवंत मान को इस पेशी के लिए तलब नहीं किया गया था।
क्या है विवादित कानून?
’जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026′ को इसी साल 13 अप्रैल को पंजाब विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित किया गया था। इसमें गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों के लिए आजीवन कारावास (Life Imprisonment) जैसी कड़ी सजा का प्रावधान है। हालांकि, अकाल तख्त और SGPC का आरोप है कि सरकार ने सिख पंथ और धार्मिक संस्थाओं से बिना किसी सलाह-मशविरे के यह कानून बनाया, जिसकी कई धाराएं सिख मर्यादा और परंपराओं के खिलाफ हैं।
अकाल तख्त के सामने पेश होने वाले प्रमुख मंत्रियों और विधायकों की सूची
सोमवार को अकाल तख्त के सामने पेश होने वाले 38 नेताओं में आम आदमी पार्टी के अलावा कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल (SAD) और निर्दलीय विधायक भी शामिल थे:
पंजाब कैबिनेट मंत्री (09):
हरपाल सिंह चीमा (वित्त मंत्री)
गुरमीत सिंह खुद्दियां (कृषि मंत्री)
डॉ. बलबीर सिंह (स्वास्थ्य मंत्री)
हरजोत सिंह बैंस (शिक्षा मंत्री)
हरभजन सिंह ईटीओ (लोक निर्माण मंत्री)
हरदीप सिंह मुंडियन (राजस्व मंत्री)
डॉ. बलजीत कौर (महिला एवं बाल विकास मंत्री)
तरुणप्रीत सिंह सोंड (ग्रामीण विकास मंत्री)
डॉ. रवजोत सिंह (NRI मामलों के मंत्री)
सिख विधायक (29):
विधानसभा अध्यक्ष: कुलतार सिंह संधवान
आम आदमी पार्टी (AAP): कुलवंत सिंह, जीवन सिंह सांगोवाल, मनविंदर सिंह गियासपुरा, सरवजीत कौर मानुके, देविंदरजीत सिंह लड्डी, फौजा सिंह सरारी, नरिंदर पाल सिंह सावना, अमनदीप सिंह, जगदीप सिंह, गुरदित सिंह, अमलोक सिंह, बलकार सिद्धू, जगरूप गिल, बलजिंदर कौर, अमनशेर सिंह शेरी कालसी, अमरपाल सिंह, गुरदीप सिंह, कुलदीप धालीवाल, जसबीर सिंह, जीवन ज्योत कौर, जसविंदर सिंह, सरवन सिंह धुन, दलबीर सिंह, इंदरबीर सिंह निज्जर, मनजीत सिंह बिलासपुर, रणबीर सिंह भुल्लर, हरदीप सिंह डिम्पी ढिल्लों, जगसीर सिंह मैसरखाना, मंजिंदर सिंह लालपुरा।
कांग्रेस (Congress): प्रताप सिंह बाजवा (विपक्ष के नेता), बरिंदरमीत सिंह पहरा, राणा गुरजीत सिंह, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखबिंदर सिंह सरकारिया, सुखपाल सिंह खैरा, बलविंदर सिंह।
शिरोमणि अकाली दल (SAD): गनीव कौर मजीठिया, मनप्रीत सिंह अयाली (बागी विधायक)।
निर्दलीय (Independent): राणा इंदर प्रताप सिंह।
नेताओं की प्रतिक्रिया
पेशी से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह बाजवा और अकाली विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने कहा कि अकाल तख्त सिखों की सर्वोच्च संस्था है और उसके द्वारा दिए गए हर निर्देश का पूरी तरह पालन किया जाएगा। ‘आप’ विधायक गुरदीत सिंह सेखों ने सफाई देते हुए कहा कि सरकार की मंशा केवल बेअदबी करने वालों को सख्त सजा दिलाना था, लेकिन पंथ की सर्वोच्चता का सम्मान सर्वोपरि है।
