Monday, June 29, 2026
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कर्नाटक: मुख्यमंत्री आवास ‘अनुग्रह’ को लेकर अंधविश्वास, 160 साल पुरानी हेरिटेज बिल्डिंग ‘कुमारकृपा’ में शिफ्ट होंगे CM डीके शिवकुमार

कर्नाटक: मुख्यमंत्री आवास ‘अनुग्रह’ को लेकर अंधविश्वास, 160 साल पुरानी हेरिटेज बिल्डिंग ‘कुमारकृपा’ में शिफ्ट होंगे CM डीके शिवकुमार

​पॉलिटिकल डेस्क: कर्नाटक के मुख्यमंत्री के सरकारी आवास ‘अनुग्रह’ को लेकर पिछले कई सालों से एक ऐसी राजनीतिक धारणा बनी हुई है, जिसके चलते कोई भी मुख्यमंत्री वहां रहने से कतराता है। अब खबरें हैं कि कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी इस ‘मनहूस’ माने जाने वाले बंगले में रहने के बजाय बेंगलुरु स्थित 160 साल पुरानी हेरिटेज बिल्डिंग ‘कुमारकृपा’ में शिफ्ट होने की योजना बना रहे हैं। मुख्यमंत्री के इस फैसले और कुमारकृपा में चल रहे रिनोवेशन (जीर्णोद्धार) को लेकर राज्य में सियासी घमासान शुरू हो गया है।

​’कुमारकृपा’ में वास्तु के हिसाब से बदलाव, दशहरा पर शिफ्ट हो सकते हैं CM

​’कुमारकृपा’ को अभी तक कर्नाटक सरकार के गेस्ट हाउस के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार वास्तु और ज्योतिष (Astrology) में गहरा विश्वास रखते हैं, इसलिए उनकी सुविधा और वास्तु दोषों को दूर करने के लिए इस ऐतिहासिक इमारत में जरूरी बदलाव किए जा रहे हैं।

​पीडब्लूडी का काम: आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद लोक निर्माण विभाग (PWD) यहां 6 फीट की बाउंड्री वॉल सहित कई अन्य जरूरी बदलाव कर रहा है।

​समय सीमा: पीडब्लूडी के मुताबिक इन बदलावों को पूरा होने में लगभग 3 महीने का समय लगेगा। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार दशहरा के शुभ अवसर पर यहां शिफ्ट हो सकते हैं।

​आखिर ‘अनुग्रह’ को क्यों माना जाता है ‘मनहूस’?

​’अनुग्रह’ को विशेष रूप से कर्नाटक के मुख्यमंत्री के आधिकारिक सरकारी आवास के तौर पर ही तैयार किया गया था। लेकिन समय के साथ इसके साथ ‘छोटे कार्यकाल’ और ‘अशुभ’ होने की थ्योरी जुड़ गई:

​राजनीतिक संयोग: इस बंगले का इतिहास किसी भूतिया कहानी या अलौकिक घटना से नहीं, बल्कि राजनीतिक संयोगों से जुड़ा है। यहां रहने वाले कई मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल या तो बहुत छोटा रहा या उनकी सरकारें अचानक राजनीतिक संकट में घिर गईं।

​धारणा को मिला बल: इसके विपरीत, जिन मुख्यमंत्रियों ने ‘अनुग्रह’ के बजाय दूसरे बंगलों को चुना, वे लंबे समय तक और स्थिरता के साथ शासन करने में सफल रहे। इसी पैटर्न को देखकर राजनीतिक स्टाफ और नौकरशाहों ने इसे मजाक में ‘मनहूस’ कहना शुरू किया, जो बाद में एक पक्की धारणा बन गया।

​विफल रहे वास्तु उपाय: कई नेताओं और ज्योतिषियों ने दावा किया कि इस बंगले की दिशा अशुभ है। इसे ठीक करने के लिए पूर्व में कई बार तोड़-फोड़ की गई, कमरों के रुख बदले गए और बड़े पूजा-अनुष्ठान भी हुए, लेकिन इस बंगले का अपयश दूर नहीं हो सका।

​जेडीएस (JDS) का तीखा हमला: “निजी फायदे के लिए इतिहास से खिलवाड़”

​जनता दल (सेक्युलर) ने ‘कुमारकृपा’ जैसी ऐतिहासिक धरोहर में किए जा रहे बदलावों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को आड़े हाथों लिया है। जेडीएस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक बेहद तल्ख पोस्ट साझा की है।

​”बेंगलुरु की पहचान और 160 साल पुरानी हेरिटेज बिल्डिंग ‘कुमारकृपा’ में डीके शिवकुमार अपने निजी फायदे और अंधविश्वास के लिए बदलाव कर रहे हैं। यह बेहद निंदनीय और शर्मनाक है। ‘कुमारकृपा’ वह ऐतिहासिक स्थल है जहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी रुके थे और जो दीवान के. शेषाद्रि अय्यर की यादें संजोए हुए है। इसे सिर्फ अपनी सुविधा के लिए होम ऑफिस में बदलना और इसके मूल स्वरूप से छेड़छाड़ करना अक्षम्य है। मुख्यमंत्री जी, यह किसी की निजी संपत्ति नहीं है; हेरिटेज बिल्डिंगों को न छुएं और इस काम को तुरंत रोकें!”

​अब देखना होगा कि विपक्ष के इस भारी विरोध और हेरिटेज के नुकसान के आरोपों के बीच मुख्यमंत्री सचिवालय या पीडब्लूडी इस रिनोवेशन को लेकर क्या सफाई पेश करता है।

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