कर्णप्रयाग विवाद में जेल में बंद चारों निहंगों को मिली जमानत, पंजाब से आए निहंगों ने दिया था अल्टीमेटम
कर्णप्रयाग विवाद में जेल में बंद चारों निहंगों को मिली जमानत, पंजाब से आए निहंगों ने दिया था अल्टीमेटम
गोपेश्वर: उत्तराखंड के चमोली जिले के कर्णप्रयाग में हुए हिंसक विवाद के मामले में जेल में बंद चारों निहंग सिखों को आज 27 जून को बड़ी राहत मिली है। गोपेश्वर जिला न्यायालय के जिला और सत्र न्यायाधीश विंध्याचल सिंह ने चारों निहंगों की जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए उन्हें जेल से रिहा करने का आदेश जारी किया है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस मामले की कानूनी सुनवाई कोर्ट में लगातार जारी रहेगी और कानून के मुताबिक ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस जमानत से पहले, चारों निहंगों की रिहाई की मांग को लेकर उत्तराखंड और पंजाब के निहंग सिखों द्वारा लगातार प्रदर्शन और हंगामा किया जा रहा था, जिससे सीमावर्ती इलाकों में तनाव की स्थिति बनी हुई थी।
क्या था पूरा कर्णप्रयाग विवाद?
यह पूरा मामला बीती 16 जून का है, जब सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल ‘हेमकुंड साहिब’ के दर्शन करने के बाद निहंगों का एक दल मोटरसाइकिलों से वापस लौट रहा था।
व्यापारियों से झड़प: वापस लौटते समय कर्णप्रयाग बाजार में किसी बात को लेकर निहंगों की स्थानीय व्यापारियों से बहस हो गई। देखते ही देखते यह विवाद बेहद हिंसक मारपीट में बदल गया।
तलवार से हमला: आरोप है कि इस झड़प के दौरान कुछ निहंगों ने तलवारों से हमला कर दिया, जिससे कई स्थानीय लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
हाईवे जाम: इस घटना से गुस्साए कर्णप्रयाग के स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (Badrinath Highway) को पूरी तरह जाम कर दिया था। इसके बाद पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए चार निहंगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जिसके बाद से ही क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ था।
बैरिकेडिंग तोड़कर उत्तराखंड में घुसने का प्रयास और अल्टीमेटम
चारों निहंगों की गिरफ्तारी के विरोध में पंजाब के निहंग संगठनों ने 25 जून को भारी संख्या में उत्तराखंड कूच करने का खुला ऐलान किया था:
बॉर्डर पर तनाव: योजना के मुताबिक करीब 400 निहंगों का जत्था पंजाब से उत्तराखंड की तरफ बढ़ा। उत्तराखंड पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से इस दल को देहरादून जिले में हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर स्थित कुल्हान चेकपोस्ट पर ही रोक लिया।
बैरिकेडिंग तोड़ी: इस दौरान निहंगों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई और कुछ निहंगों ने पुलिस द्वारा लगाई गई बैरिकेडिंग को तोड़कर जबरन देहरादून की सीमा में प्रवेश करने का प्रयास किया। हालांकि, बाद में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें समझा-बुझाकर वापस भेज दिया।
वापस लौटने के बाद निहंगों ने उत्तराखंड सरकार और पुलिस प्रशासन को कड़ा अल्टीमेटम दिया था कि यदि दो दिनों के भीतर जेल में बंद साथियों को रिहा नहीं किया गया, तो वे दोबारा उग्र आंदोलन और उत्तराखंड की तरफ कूच करेंगे। वर्तमान में ये सभी निहंग हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब गुरुद्वारे में डेरा डाले हुए थे। इस भारी तनाव के बीच आज चमोली कोर्ट से चारों निहंगों को जमानत मिल गई है।
