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ज्येष्ठ पूर्णिमा: आर्थिक उन्नति और पारिवारिक सुख के लिए आज करें इन 5 विशेष मंत्रों का जप

ज्येष्ठ पूर्णिमा: आर्थिक उन्नति और पारिवारिक सुख के लिए आज करें इन 5 विशेष मंत्रों का जप

​नई दिल्ली: हिंदू धर्म में ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन धन की देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से घर में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि इस शुभ तिथि पर कुछ विशेष मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जप किया जाए, तो जीवन से आर्थिक तंगी दूर होती है और पारिवारिक कलह से मुक्ति मिलती है।

​आर्थिक उन्नति और पारिवारिक खुशहाली के लिए ज्येष्ठ पूर्णिमा पर इन 5 मंत्रों का जप बेहद शुभ माना गया है:

​1. मां लक्ष्मी का बीज मंत्र (आर्थिक लाभ के लिए)

​मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्माकम् दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि नमः।

​महत्व: इस मंत्र के जप से कर्ज से मुक्ति मिलती है और धन आगमन के नए मार्ग खुलते हैं।

​2. विष्णु गायत्री मंत्र (पारिवारिक सुख-शांति के लिए)

​मंत्र: ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात।

​महत्व: भगवान विष्णु के इस मंत्र का जप करने से परिवार में आपसी प्रेम बढ़ता है और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।

​3. महालक्ष्मी अष्टकम (स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए)

​मंत्र: नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते॥

​महत्व: पूर्णिमा की रात इस मंत्र का पाठ करने से घर में दरिद्रता का नाश होता है और वैभव की प्राप्ति होती है।

​4. सुख-समृद्धि का मंत्र

​मंत्र: ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः।

​महत्व: यह मंत्र बेहद सरल और प्रभावशाली है। इसके नियमित जप से जीवन में सुख-सुविधाओं की वृद्धि होती है।

​5. चंद्र देव का मंत्र (मानसिक शांति के लिए)

​मंत्र: ॐ सों सोमाय नमः।

​महत्व: चूंकि पूर्णिमा के स्वामी चंद्र देव हैं, इसलिए इस दिन उनके मंत्र का जप करने से कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है, जिससे मानसिक शांति और पारिवारिक सौहार्द बना रहता है।

​पूजा की सरल विधि:

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं। इसके बाद हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर व्रत का संकल्प लें और पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशा के आसन पर बैठकर इन मंत्रों का कम से कम 108 बार जप करें।

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