देहरादून-हिमाचल बॉर्डर विवाद सुलझा: प्रशासन और निहंग सिखों के बीच बनी आम सहमति, कुल्हाल बॉर्डर दोबारा खुला
देहरादून-हिमाचल बॉर्डर विवाद सुलझा: प्रशासन और निहंग सिखों के बीच बनी आम सहमति, कुल्हाल बॉर्डर दोबारा खुला
देहरादून/विकासनगर: उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुल्हाल बॉर्डर पर बीती रात से चल रहा तनाव आखिरकार जिला प्रशासन और निहंग सिखों के बीच हुई वार्ता के बाद शांत हो गया है। दोनों पक्षों में आम सहमति बनने के बाद प्रशासन ने कुल्हाल बॉर्डर को दोबारा खोल दिया है, जिससे वाहनों की रुकी हुई आवाजाही फिर से सुचारू रूप से शुरू हो गई है।
तय सहमति के अनुसार, निहंग सिख अगले दो दिनों तक पांवटा साहिब गुरुद्वारे में ही डेरा डालेंगे। इस दौरान सिखों का एक डेलिगेशन (शिष्टमंडल) कर्णप्रयाग घटना के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए आरोपी निहंगों से मुलाकात करेगा। डेलिगेशन ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि सिखों की पवित्र ‘हेमकुंड साहिब यात्रा’ को बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चलने दिया जाए। दो दिन के बाद निहंग सिख अपनी आगे की रणनीति तय करेंगे।
रात भर चला हाई-वोल्टेज ड्रामा, सील करना पड़ा था बॉर्डर
इस विवाद की शुरुआत बीती रात तब हुई जब कर्णप्रयाग और नगरासू मामलों से आक्रोशित करीब 150 से 200 निहंग सिखों के जत्थे ने हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर कुल्हाल गेट बॉर्डर पर लगी पुलिस बैरिकेडिंग को जबरन हटा दिया। कुछ वाहनों में तोड़फोड़ करते हुए निहंगों ने उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश कर लिया था।
पुलिस को चकमा देकर ये निहंग देहरादून के रेसकोर्स स्थित गुरुद्वारे पहुंच गए। हालांकि, पुलिस और प्रशासन ने सूझबूझ दिखाते हुए उन्हें समझा-बुझाकर वापस पांवटा साहिब भेज दिया। इसके बाद दोबारा ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए विकासनगर-कुल्हाल बॉर्डर को पूरी तरह सील कर दिया गया था और पांवटा पुल पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई थीं।
बॉर्डर पर पहुंचे देहरादून और हरिद्वार के आला अफसर
स्थिति को नियंत्रित करने और मामले को बातचीत से सुलझाने के लिए उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश पुलिस के साथ-साथ आईटीबीपी (ITBP) के जवान मुस्तैदी से तैनात रहे। इस बीच, देहरादून के जिलाधिकारी (DM) आशीष चौहान, एसएसपी (SSP), हरिद्वार देहात के एसपी और विकासनगर के एसडीएम खुद मोर्चा संभालने पांवटा साहिब गुरुद्वारे पहुंचे। निहंगों के साथ हुई यह प्रशासनिक वार्ता पूरी तरह सफल रही। देहरादून के डीएम आशीष चौहान ने खुद इसके सफल रहने की पुष्टि की है।
आखिर क्यों उत्तराखंड कूच कर रहे हैं निहंग सिख?
इस पूरे विवाद की जड़ें चमोली जिले के कर्णप्रयाग और नगरासू में हुई दो अलग-अलग घटनाओं से जुड़ी हैं:
16 जून का कर्णप्रयाग विवाद: हेमकुंड साहिब की यात्रा से लौट रहे निहंगों और स्थानीय लोगों के बीच मामूली बात पर विवाद हो गया था। यह विवाद इतना बढ़ गया कि निहंगों ने तलवारें निकाल लीं, जिसके जवाब में स्थानीय लोगों ने डंडों का इस्तेमाल किया। इस हिंसक झड़प में तलवार के वार से कई स्थानीय लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जिनमें से एक को एयरलिफ्ट तक करना पड़ा था। इस मामले में पुलिस ने कुछ निहंगों को गिरफ्तार किया है।
नगरासू गुरुद्वारा विवाद: कर्णप्रयाग की घटना के बाद कुछ निहंगों का नगरासू गुरुद्वारे की प्रबंधन कमेटी के लोगों से विवाद हो गया। निहंगों ने गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर कब्जा कर उसे करीब चार दिनों तक बंधक बनाए रखा।
मुख्य मांग: नगरासू से सुरक्षित बाहर निकलने के बाद जब ये निहंग पंजाब पहुंचे, तो उन्होंने उत्तराखंड कूच का ऐलान कर दिया। निहंगों की मुख्य मांग है कि कर्णप्रयाग हिंसा मामले में गिरफ्तार किए गए उनके साथियों को तुरंत रिहा किया जाए। हालांकि, फिलहाल दो दिनों के लिए इस कूच को टाल दिया गया है और प्रशासन स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है।
