Saturday, June 20, 2026
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अमेरिका-ईरान समझौता: सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई का दावा- “समझौते के लिए बेताब थे ट्रंप”, अमेरिकी राष्ट्रपति ने 300 अरब डॉलर की बात को बताया ‘फेक न्यूज’

अमेरिका-ईरान समझौता: सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई का दावा- “समझौते के लिए बेताब थे ट्रंप”, अमेरिकी राष्ट्रपति ने 300 अरब डॉलर की बात को बताया ‘फेक न्यूज’

​तेहरान/वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होने के ठीक एक दिन बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बयानों का दौर तेज हो गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर सीधा निशाना साधते हुए दावा किया है कि अमेरिकी प्रशासन इस समझौते को करने के लिए बेहद “बेताब” था। दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को भारी रकम दिए जाने की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए इसे विपक्ष का दुष्प्रचार करार दिया है।

​शुरुआत में विरोधी था, राष्ट्रपति के भरोसे के बाद दी मंजूरी: मुज्तबा खामेनेई

​समझौते के मसौदे पर मुहर लगने के बाद ईरानी लोगों को संबोधित करते हुए सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई ने एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि वैचारिक और सैद्धांतिक तौर पर वे शुरू में अमेरिका के साथ किसी भी तरह के समझौते के पूरी तरह खिलाफ थे।

​खामेनेई ने अपने संबोधन में कहा:

​”वाशिंगटन के साथ हुए इस समझौता ज्ञापन (MoU) को लेकर मेरी राय बिल्कुल अलग थी और मुझे गहरी शंकाएं थीं। लेकिन ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) के वरिष्ठ सदस्यों ने मुझे व्यक्तिगत रूप से यह पूरी तरह आश्वस्त किया कि इस सौदे से ईरान के राष्ट्रीय हितों और ‘रेज़िस्टेंस फ्रंट’ (प्रतिरोध मोर्चे) को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। उनके इसी भरोसे और वादों के बाद मैंने आखिरकार इसे अपनी मंजूरी दी।”

​उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा कि अमेरिकी नेता इस समझौते को हासिल करने के लिए हर संभव हथकंडा अपना रहे थे।

​300 अरब डॉलर के पेमेंट की खबर ‘फेक न्यूज’: डोनाल्ड ट्रंप

​दूसरी तरफ, अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में इस चर्चा ने जोर पकड़ लिया था कि इस समझौते के बदले अमेरिका द्वारा ईरान को एक बड़ी धनराशि दी जा रही है। इन खबरों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर तीखा पलटवार किया।

​ट्रंप ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा:

​”अमेरिका की तरफ से ईरान को 300 अरब डॉलर का कोई भुगतान नहीं किया जा रहा है। यह पूरी तरह से ‘फेक न्यूज’ (झूठी खबर) है। यह केवल डेमोक्रेट्स का फैलाया हुआ प्रोपेगैंडा (दुष्प्रचार) है। अमेरिका के लिए यह समझौता केवल कामयाबी, तेल की कम कीमतें और एक बड़ी जीत लेकर आया है। शेयर बाजार (स्टॉक मार्केट) का रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना इसका सबूत है।”

​ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिका क्षेत्र में शांति के लिए प्रतिबद्ध है और वे मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) के सभी पक्षों से अपील करते हैं कि बातचीत को आगे बढ़ाने के वादे पर कायम रहें। उन्होंने लेबनान, हिज़्बुल्लाह और इज़राइल सहित सभी मोर्चों पर पूर्ण युद्धविराम (Ceasefire) की उम्मीद भी जताई।

​बंद कमरे की ब्रीफिंग: परमाणु ठिकानों की जांच के लिए राजी हुआ ईरान

​इस बीच, समझौते के तकनीकी पहलुओं को लेकर एक और बड़ी जानकारी सामने आई है। समाचार एजेंसी ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ (AP) के मुताबिक, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकोफ ने अमेरिकी सांसदों और राष्ट्रीय सुरक्षा समितियों के सदस्यों के साथ एक बंद कमरे में प्राइवेट ब्रीफिंग की।

​इस बातचीत की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि समझौते के तहत ईरान अपनी परमाणु साइटों की जांच के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) की परमाणु निगरानी संस्था ‘अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी’ (IAEA) को आमंत्रित करने के लिए तैयार हो गया है। तेहरान जल्द ही अपने संवर्धित (enriched) परमाणु मटीरियल वाली जगहों की पहचान करने और उनका पता लगाने की प्रक्रिया शुरू करेगा।

​कोई ‘साइड डील’ नहीं, बल्कि IAEA को भेजा गया ‘साइड लेटर’

​विटकोफ ने सांसदों को स्पष्ट किया कि अमेरिका और ईरान के मुख्य समझौते (MOU) में कोई भी गुप्त या ‘साइड डील’ शामिल नहीं की गई है। हालांकि, तेहरान और IAEA के बीच एक ‘साइड लेटर’ जरूर तैयार किया गया है।

​इस पत्र को IAEA के डायरेक्टर-जनरल राफेल मारियानो ग्रोसी को भेजा गया है, जिसमें जांच का निमंत्रण शामिल है। विटकोफ ने भरोसा जताया कि इस आधिकारिक पत्र की मदद से अमेरिकी परमाणु निरीक्षकों (Nuclear Inspectors) को भी तेहरान ले जाने और जांच प्रक्रिया में शामिल करने का रास्ता साफ हो सकेगा।

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