Thursday, June 18, 2026
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पेंटागन का बड़ा खुलासा: ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों में हुआ एलन मस्क के AI टूल ‘ग्रोक’ का इस्तेमाल, पर्यावरण मुकदमे में बचाव में उतरी ट्रंप सरकार

पेंटागन का बड़ा खुलासा: ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों में हुआ एलन मस्क के AI टूल ‘ग्रोक’ का इस्तेमाल, पर्यावरण मुकदमे में बचाव में उतरी ट्रंप सरकार

​वाशिंगटन: दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क (Elon Musk) के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टार्टअप ‘xAI’ और उनके चर्चित एआई टूल ‘ग्रोक’ (Grok) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा हुआ है। अमेरिकी सरकार के एक आधिकारिक कानूनी दस्तावेज से यह साफ हो गया है कि इस आधुनिक एआई टूल का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हालिया सैन्य हमलों (Use of AI in War) में रणनीतिक रूप से किया गया था।

​यह सनसनीखेज जानकारी 15 जून को अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) द्वारा कोर्ट में दाखिल किए गए एक दस्तावेज के जरिए सामने आई है। दरअसल, एलन मस्क की कंपनी xAI के मेम्फिस स्थित विशाल डेटा सेंटर में इस्तेमाल हो रहे गैस टर्बाइनों को लेकर एक पर्यावरण संबंधी मुकदमा चल रहा है। इस मुकदमे में मस्क की कंपनी का बचाव करने के लिए खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार सामने आई है और एआई टूल की अनिवार्य उपयोगिता साबित करने के लिए इसके सैन्य इस्तेमाल का सबूत पेश किया है।

​”मस्क की कंपनी पर केस, अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा”

​अदालत में दाखिल इस दस्तावेज में अमेरिकी न्याय विभाग के वकीलों ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि xAI के खिलाफ यह कानूनी कार्रवाई सीधे तौर पर अमेरिका की राष्ट्रीय, आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा (National & Economic Security) के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करती है। सरकार का तर्क है कि इस मुकदमे के जरिए उस बिजली और ऊर्जा आपूर्ति को बंद कराने की कोशिश की जा रही है, जो देश के सबसे उन्नत एआई इनोवेशन को शक्ति देती है और जो सीधे तौर पर अमेरिकी सेना के लाइव ऑपरेशन्स का सपोर्ट करती है।

​’प्रोजेक्ट मेवन’ और ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में ग्रोक का रोल

​अदालत में अपने दावों को मजबूती से स्थापित करने के लिए सरकारी वकीलों ने पेंटागन के एआई प्रमुख कैमरन स्टेनली (Cameron Stanley) की आधिकारिक गवाही और हलफनामा पेश किया। स्टेनली ने शपथ लेकर अदालत को बताया कि:

​टारगेट चुनने में मदद: मस्क के ‘ग्रोक एआई’ का इस्तेमाल अमेरिकी सेना के बेहद गोपनीय और महत्वाकांक्षी कार्यक्रम ‘प्रोजेक्ट मेवन’ (Project Maven) में किया जा रहा है। प्रोजेक्ट मेवन अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) का एक ऐसा एआई सिस्टम है, जो युद्ध के मैदान में दुश्मनों के सटीक ठिकानों (Targets) की पहचान करता है। (शुरुआत में यह सिस्टम एंथ्रोपिक कंपनी के ‘क्लॉड’ मॉडल पर आधारित था)।

​96 घंटे में 2000 हमले: कैमरन स्टेनली के बयान के मुताबिक, प्रोजेक्ट मेवन की ‘मेवन स्मार्ट सिस्टम्स’ तकनीक ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान) के दौरान अमेरिकी सेना को अभूतपूर्व गति दी। इस तकनीक की मदद से सेना ने महज 96 घंटों के भीतर 2,000 अलग-अलग टारगेट चुने और उन पर 2,000 से ज्यादा सटीक हथियार दागे।

​स्टेनली ने एलन मस्क की तकनीक की खुलकर सराहना की और कहा कि “ग्रोक गव मॉडल” (Grok Gov Model) के शामिल होने के बाद से अमेरिकी सैन्य अभियानों की मारक क्षमता, सटीकता और काम करने की गति कई गुना बढ़ गई है।

​आखिर एलन मस्क की कंपनी पर किसने और क्यों किया है केस?

​एलन मस्क की कंपनी xAI को यह कानूनी चुनौती अमेरिका के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित नागरिक अधिकार संगठन NAACP (नेशनल एसोसिएशन फॉर द एडवांसमेंट ऑफ कलर्ड पीपल) की ओर से मिली है। अश्वेत लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले इस संगठन ने आरोप लगाया है कि:

​पर्यावरण नियमों का उल्लंघन: xAI अपने डेटा सेंटर को चौबीसों घंटे चलाने और बिजली देने के लिए बिना उचित कानूनी अनुमति (Permit) के दर्जनों भारी गैस टर्बाइन चला रहा है, जो अमेरिका के ‘क्लीन एयर एक्ट’ (Clean Air Act) का सीधा उल्लंघन है।

​अश्वेत इलाकों में प्रदूषण: अधिकार समूह का कहना है कि इन टर्बाइनों से निकलने वाला भारी धुआं और प्रदूषण उन रिहायशी इलाकों को प्रभावित कर रहा है, जहां बहुसंख्यक आबादी अश्वेत और कम आय वाले लोगों की है, जिससे उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है।

​xAI का क्या है तर्क?

इस पूरे विवाद पर एलन मस्क की कंपनी xAI का कहना है कि डेटा सेंटर में इस्तेमाल किए जा रहे ये गैस टर्बाइन अस्थायी (Temporary) हैं और इन्हें आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है (Mobile/Portable Turbines)। कंपनी का तर्क है कि अस्थायी श्रेणी में होने के कारण इन पर वे कड़े पर्यावरण नियम और परमिट लागू नहीं होते, जिनकी मांग नागरिक अधिकार संगठन कर रहा है।

​इस अदालती लड़ाई ने अब एक नया मोड़ ले लिया है, जहां एक तरफ पर्यावरण और नागरिक अधिकार हैं, तो दूसरी तरफ खुद अमेरिकी सरकार द्वारा समर्थित राष्ट्रीय सुरक्षा और युद्ध स्तर पर इस्तेमाल हो रही सुपर-एआई तकनीक खड़ी है।

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