कार इंश्योरेंस क्लेम: इन 5 बड़ी गलतियों के कारण खारिज हो सकता है आपका दावा, पॉलिसी धारक रखें इन बातों का खास ख्याल
कार इंश्योरेंस क्लेम: इन 5 बड़ी गलतियों के कारण खारिज हो सकता है आपका दावा, पॉलिसी धारक रखें इन बातों का खास ख्याल
नई दिल्ली: जब भी हमारी गाड़ी से कोई दुर्घटना होती है या उसमें कोई बड़ी तकनीकी खराबी आती है, तो सबसे पहले दिमाग में इंश्योरेंस क्लेम (Insurance Claim) का ही ख्याल आता है। हर वाहन मालिक हर साल समय पर भारी-भरकम प्रीमियम इसीलिए भरता है ताकि मुसीबत के समय उसे आर्थिक सुरक्षा और मदद मिल सके। लेकिन कई बार पॉलिसी धारक की छोटी-छोटी गलतियों या नियमों की अनदेखी की वजह से बीमा कंपनियां क्लेम को पूरी तरह खारिज (Reject) कर देती हैं। ऐसे में जेब पर भारी नुकसान पड़ना तय है। आइए विस्तार से जानते हैं कि वे कौन सी वजहें हैं जिनके कारण आपका इंश्योरेंस क्लेम अटक सकता है।
1. वैध ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License) का न होना
इंश्योरेंस क्लेम पास होने की सबसे पहली और बुनियादी शर्त यह है कि दुर्घटना के समय गाड़ी चलाने वाले व्यक्ति के पास एक वैध (Valid) ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए।
यदि एक्सीडेंट के वक्त ड्राइवर के पास लाइसेंस नहीं है, तो बीमा कंपनी एक रुपया भी नहीं देगी।
इसके अलावा, यदि लाइसेंस एक्सपायर (Expire) हो चुका है या ड्राइवर उस कैटेगरी की गाड़ी नहीं चला रहा था जिसका उसके पास लाइसेंस है (जैसे- कमर्शियल गाड़ी को पर्सनल लाइसेंस पर चलाना), तो भी क्लेम तुरंत रिजेक्ट कर दिया जाएगा।
2. शराब या नशीले पदार्थों का सेवन करके गाड़ी चलाना
ड्रिंक एंड ड्राइव (Drink and Drive) न केवल एक गंभीर कानूनी अपराध है, बल्कि इंश्योरेंस के नियमों के तहत भी यह पूरी तरह प्रतिबंधित है। अगर दुर्घटना के समय ड्राइवर शराब या किसी अन्य नशीले पदार्थ के प्रभाव में पाया जाता है, तो बीमा कंपनियां क्लेम को बिना किसी विचार के तुरंत खारिज कर देती हैं। इस स्थिति में पॉलिसी धारक को किसी भी प्रकार की राहत नहीं मिलती है।
3. दुर्घटना या चोरी की सूचना तुरंत न देना
किसी भी हादसे या गाड़ी चोरी होने की स्थिति में इंश्योरेंस कंपनी को सूचित करने की एक तय समय-सीमा होती है, जो आमतौर पर 24 से 48 घंटे के भीतर की होती है। यदि वाहन मालिक बिना किसी ठोस और वाजिब वजह के कंपनी को बहुत देर से सूचित करता है, तो कंपनी उस क्लेम को संदिग्ध (Suspicious) मान सकती है और उसे खारिज करने का पूरा अधिकार रखती है।
4. गाड़ी का व्यावसायिक या गलत इस्तेमाल करना
यदि आपकी गाड़ी ‘प्राइवेट या पर्सनल’ इस्तेमाल के लिए रजिस्टर्ड है, लेकिन आप उसका उपयोग सवारियां ढोने, टैक्सी के तौर पर या व्यावसायिक सामान की डिलीवरी के लिए कर रहे हैं, तो दुर्घटना होने पर कंपनी क्लेम पास नहीं करेगी। वाहन का पंजीकरण (Registration) जिस उद्देश्य के लिए हुआ है, उसका इस्तेमाल उसी दायरे में किया जाना अनिवार्य है।
5. बिना जानकारी के गाड़ी में भारी बदलाव (Modification) कराना
आजकल बहुत से लोग अपनी गाड़ी का लुक बदलने या परफॉर्मेंस बढ़ाने के लिए उसमें बड़े मॉडिफिकेशन कराते हैं। जैसे- बाहर से सीएनजी (CNG) किट लगवाना, बड़े अलॉय व्हील्स या इंजन की पावर बढ़ाना। अगर आपने इन बदलावों की आधिकारिक जानकारी आरटीओ (RTO) और अपनी इंश्योरेंस कंपनी को नहीं दी है और न ही इसे पॉलिसी में अपडेट कराया है, तो दुर्घटना के समय आपका क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।
क्लेम रिजेक्शन से बचने के लिए इन बातों का रखें विशेष ख्याल:
पॉलिसी डॉक्यूमेंट को ध्यान से पढ़ें: बीमा पॉलिसी के नियम और शर्तों (Terms & Conditions) वाले दस्तावेज को साइन करने से पहले बहुत ही बारीकी से पढ़ें ताकि बाद में ‘हिडन क्लॉज’ के कारण परेशानी न हो।
गाड़ी बेचते समय इंश्योरेंस ट्रांसफर: जब भी आप अपनी पुरानी गाड़ी किसी को बेचें, तो आरसी (RC) के साथ-साथ इंश्योरेंस को भी नए मालिक के नाम पर ट्रांसफर करना कभी न भूलें। नाम ट्रांसफर न होने की स्थिति में पुराना मालिक गाड़ी पर क्लेम नहीं ले सकता और न ही नए मालिक को इसका लाभ मिलता है।
इन छोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखकर आप मुसीबत के समय होने वाले मानसिक और आर्थिक तनाव से आसानी से बच सकते हैं।
