Thursday, June 18, 2026
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‘द इंडिया स्टोरी’ रिलीज से पहले कानूनी विवादों में: काजल अग्रवाल की फिल्म को मिला नोटिस, कृषि क्षेत्र को ‘धीमा जहर’ दिखाने का आरोप

‘द इंडिया स्टोरी’ रिलीज से पहले कानूनी विवादों में: काजल अग्रवाल की फिल्म को मिला नोटिस, कृषि क्षेत्र को ‘धीमा जहर’ दिखाने का आरोप

​मुंबई: काजल अग्रवाल और श्रेयस तलपड़े की मुख्य भूमिका वाली आगामी फिल्म ‘द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइज़न इन प्रोग्रेस’ (The India Story: Slow Poison in Progress) अपनी रिलीज से पहले ही एक बड़े कानूनी विवाद में घिर गई है। फिल्म में भारत के कृषि, डेयरी और खाद्य उत्पादन क्षेत्रों के चित्रण को लेकर मेकर्स को एक आधिकारिक कानूनी नोटिस भेजा गया है।

​यह फिल्म ज़ी स्टूडियोज़ (Zee Studios) और एमआईजी प्रोडक्शन एंड स्टूडियोज़ (MIG Production & Studios) के सहयोग से तैयार की गई है, जिसका निर्देशन चेतन डीके ने किया है। फिल्म की कहानी और निर्माण सागर बी. शिंदे द्वारा किया गया है। यह फिल्म आगामी 24 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए शेड्यूल है, लेकिन इस विवाद के बाद इसकी राह मुश्किल नजर आ रही है।

​क्यों भेजा गया कानूनी नोटिस और क्या हैं आरोप?

​यह कानूनी नोटिस 15 जून को अधिवक्ता हिरण्या पांडे द्वारा ‘एग्री बिजनेस सेंटर’ के मालिक भावेश सोधा की ओर से जारी किया गया है। यह नोटिस फिल्म के निर्माताओं सहित ज़ी स्टूडियोज़ और एमआईजी प्रोडक्शन एंड स्टूडियोज़ एलएलपी को भेजा गया है।

​शिकायतकर्ता का आरोप है कि फिल्म के टीज़र और अन्य प्रचार सामग्री (Promotional Material) में भारतीय कृषि, डेयरी और पोल्ट्री उद्योग से जुड़े बेहद भ्रामक, मानहानिकारक और वैज्ञानिक रूप से अप्रमाणित दावे किए गए हैं।

​’धीमा जहर’ के रूप में प्रस्तुतीकरण: नोटिस के अनुसार, फिल्म में भारत की संपूर्ण कृषि व्यवस्था को एक ‘स्लो पॉइज़न’ (धीमा ज़हर) के स्रोत के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें कीटनाशकों (Pesticides) के अंधाधुंध उपयोग, खाद्य पदार्थों में बड़े पैमाने पर मिलावट और देश में कैंसर के बढ़ते मामलों जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है।

​छवि खराब करने का प्रयास: शिकायतकर्ता का कहना है कि इस तरह के नकारात्मक और तथ्यहीन चित्रण से देशभर के करोड़ों किसानों, डेयरी उत्पादकों, पोल्ट्री व्यवसायों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों की सामाजिक व व्यावसायिक छवि को भारी नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा, आम जनता के मन में भी भोजन को लेकर एक अनावश्यक डर पैदा हो सकता है।

​इन दृश्यों और दावों पर जताई गई कड़ी आपत्ति

​कानूनी नोटिस में फिल्म की प्रचार सामग्री में दिखाए गए कई खास आंकड़ों और दृश्यों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं:

​कीटनाशकों की खपत पर गलत आंकड़े: फिल्म में दावा किया गया है कि भारत में अत्यधिक मात्रा में कीटनाशकों का उपयोग होता है। इसके विपरीत शिकायतकर्ता का तर्क है कि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत में प्रति हेक्टेयर कीटनाशक की खपत दुनिया के कई अन्य विकसित देशों की तुलना में काफी कम है।

​दूध में मिलावट का दावा: देश के डेयरी उद्योग को कटघरे में खड़ा करते हुए दूध में व्यापक स्तर पर मिलावट संबंधी दावों को भी गलत बताया गया है।

​पोल्ट्री उद्योग का भ्रामक दृश्य: टीज़र के एक दृश्य में एक मृत चिकन के शरीर में सिरिंज के जरिए कुछ इंजेक्ट करते हुए दिखाया गया है, जिसे वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह गलत, भ्रामक और पोल्ट्री व्यवसाय को बदनाम करने वाला करार दिया गया है।

​कैंसर से सीधा संबंध: फिल्म में आधुनिक कृषि पद्धतियों को सीधे तौर पर बढ़ते कैंसर के मामलों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। नोटिस के अनुसार, ऐसे गंभीर निष्कर्षों पर पहुंचने के लिए ठोस वैज्ञानिक प्रमाण और सत्यापित शोध (Verified Research) की आवश्यकता होती है, जो फिल्म में गायब दिखती है।

​नोटिस के जरिए मेकर्स से की गई ये मांगें

​शिकायतकर्ता ने कानूनी नोटिस के माध्यम से फिल्म निर्माताओं के सामने कुछ सख्त मांगें रखी हैं:

​मेकर्स फिल्म में दिखाए गए सभी आंकड़ों, दृश्यों और दावों के समर्थन में उपयोग किए गए शोध, प्रामाणिक स्रोतों (Sources) और उसके वैज्ञानिक आधार का पूरा खुलासा करें।

​विवादित टीज़र और अन्य प्रचार सामग्री को सभी डिजिटल व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से तत्काल प्रभाव से हटाया जाए।

​फिल्म को 24 जुलाई को रिलीज करने से पहले इसमें आवश्यक संशोधन (Changes) किए जाएं और आपत्तिजनक दृश्यों को सुधारा जाए।

​फिलहाल इस कानूनी नोटिस को लेकर ज़ी स्टूडियोज़ या फिल्म के अन्य निर्माताओं की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सिनेमाघरों में दस्तक देने से ठीक पहले लगे इन आरोपों के बाद अब देखना होगा कि मेकर्स इस विवाद को कैसे सुलझाते हैं।

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